विकसित राज्य@2047: ‘ज्ञान’ के प्रकाश से संवरता युवाओं का भविष्य

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उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, शोध और नवाचार से गढ़ी जा रही समृद्धि की नई गाथा

विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक,जनसंपर्क

NTPC World Environment Day


रायपुर । राज्य सरकार ने वर्ष 2047 तक प्रदेश को एक सर्वसुविधायुक्त, समृद्ध और ‘विकसित राज्य’ के रूप में स्थापित करने का एक ऐतिहासिक संकल्प लिया गया है। किसी भी राज्य या राष्ट्र की प्रगति केवल भौतिक संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके मानव संसाधन की दक्षता और बौद्धिक क्षमता पर टिके होती है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ प्रदेश के विकास मॉडल के केंद्र में ‘GYAN’ यानी G (गरीब), Y (युवा), A (अन्नदाता/किसान) और N (नारी) को स्थापित किया गया है। आर्थिक और सामाजिक उन्नति के इस समूचे चक्र का मुख्य आधार हमारे युवा हैं। युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देने, उन्हें उद्योगों की आधुनिक माँगों के अनुरूप ढालने और रोजगार-योग्य बनाने के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक व्यापक परिवर्तन की शुरुआत की जा चुकी है।

उच्च शिक्षा विभाग एक ‘मिशन मोड’ में कर रहा है कार्य ​प्रदेश में उच्च शिक्षा को मात्र औपचारिक डिग्रियों के वितरण तक सीमित न रखकर उसे गुणवत्तापूर्ण, व्यावसायिक और परिणामोन्मुख बनाने के लिए निरंतर नीतिगत पहल की जा रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग एक 'मिशन मोड' में कार्य कर रहा है। 'उच्च शिक्षा मिशन योजना' के माध्यम से युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, जिसका सीधा प्रभाव राज्य के सकल नामांकन अनुपात (GER) पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2021-22 में जहाँ प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात 19.6 प्रतिशत था, वहीं विभाग के सतत प्रयासों से यह बढ़कर वर्तमान में 27.5 प्रतिशत हो चुका है। सरकार का लक्ष्य NEP-2020 के अनुरूप वर्ष 2035 तक इस अनुपात को 50 प्रतिशत तक पहुँचाना है।

सर्वसुविधायुक्त ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है ​विद्यार्थियों के सर्वांगीण और समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक सर्वसुविधायुक्त 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही, शोध और अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना' का खाका तैयार किया गया है। शिक्षा को जड़ों से जोड़ने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में प्रमुखता से शामिल किया गया है।

प्रदेश के कुल 343 शासकीय महाविद्यालयों में से नैक मूल्यांकन के लिए पात्र ​उच्च शिक्षा में पारदर्शिता और वैश्विक मानकों को सुनिश्चित करने के लिए संस्थानों के 'नैक' (NAAC) मूल्यांकन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के कुल 343 शासकीय महाविद्यालयों में से नैक मूल्यांकन के लिए पात्र 254 महाविद्यालयों में से 200 का मूल्यांकन सफलता से पूर्ण हो चुका है। इसी तरह प्रदेश के 09 विश्वविद्यालयों में से 05 विश्वविद्यालयों का नैक मूल्यांकन संपन्न हो गया है। इससे न केवल संस्थानों की गुणवत्ता सुधर रही है, बल्कि विद्यार्थियों को भी पारदर्शी आधार पर अपने लिए सर्वश्रेष्ठ संस्थान चुनने का अवसर मिल रहा है।

प्रदेश में 08 नए शासकीय महाविद्यालय, 05 नए निजी महाविद्यालय तथा 03 नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना ​भविष्य की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शैक्षणिक अवसंरचना का भी तेज़ी से विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025–26 में प्रदेश में 08 नए शासकीय महाविद्यालय, 05 नए निजी महाविद्यालय तथा 03 नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। केवल भवनों का निर्माण ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों में फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए प्राध्यापकों के 595 पदों और सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल एवं क्रीड़ाधिकारी के 700 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ​स्पष्ट है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे ये समन्वित प्रयास केवल व्यवस्थागत सुधार नहीं हैं, बल्कि यह हमारे युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और वर्ष 2047 के स्वर्णिम व विकसित प्रदेश की ठोस नींव रखने की एक सुदृढ़ प्रतिबद्धता है।

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