इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा : केदार कश्यप
वन मंत्री ने हरेली बर्ड फेस्टिवल का किया शुभारंभ
रायपुर । बस्तर के दरभा क्षेत्र में तीन दिवसीय हरेली बर्ड फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर वन मंत्री ने कहा कि बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के कारण देश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल होने की क्षमता रखता है। हरेली बर्ड फेस्टिवल के माध्यम से बस्तर की प्राकृतिक संपदा, पक्षी विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
तीन दिवसीय आयोजन में पक्षी प्रेमियों, पर्यावरणविदों, स्थानीय ग्रामीणों, विद्यार्थियों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। आयोजन के माध्यम से बस्तर के प्राकृतिक वातावरण और यहां मौजूद पक्षी प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में जनजागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

बस्तर के वनों में कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह आयोजन पक्षी संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि बस्तर के वनों में कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं और उनका संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। हरेली बर्ड फेस्टिवल से इको-टूरिज्म को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को बर्ड गाइड, होम-स्टे, पर्यटन सेवाओं और प्रकृति आधारित आजीविका के क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी के बिना प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों का प्रभावी संरक्षण संभव नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों से वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा में वन विभाग का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र और जैव विविधता बस्तर की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा है, जिसका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।
बस्तर के जंगल विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और वन्यजीवों के साथ अनेक पक्षी प्रजातियों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं। ऐसे क्षेत्रों में पक्षियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिल सकती है।
‘गज संकेत’ मोबाइल ऐप किया लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहल की गईं। हरेली बर्ड फेस्टिवल का आधिकारिक लोगो जारी किया गया और मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के उद्देश्य से ‘गज संकेत’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया।
‘गज संकेत’ मोबाइल ऐप के माध्यम से मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने और प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की गई है। मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर समन्वय तथा सुरक्षा के लिए ऐसी तकनीकी पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
साथ ही बस्तर की प्राकृतिक विरासत पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक और अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इन प्रकाशनों के माध्यम से बस्तर की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और पर्यावरणीय विशेषताओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी बस्तर पहाड़ी मैना के संरक्षण पर विशेष प्रस्तुति दी गई। बस्तर पहाड़ी मैना प्रदेश की महत्वपूर्ण पक्षी प्रजातियों में शामिल है और इसके संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
1,233 हितग्राहियों को 17 करोड़ 9 लाख रुपये की सहायता राशि
इस अवसर पर राज मोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत जून 2026 तक 1,233 हितग्राहियों को 17 करोड़ 9 लाख रुपये की सहायता राशि के वितरण की शुरुआत की गई। योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले हाथी मित्र दल, मैना मित्र दल और गिद्ध मित्र दल के सदस्यों को सम्मानित भी किया गया। इन दलों के सदस्यों द्वारा वन्यजीवों और पक्षियों के संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने में किए जा रहे प्रयासों को मंच से सराहा गया।
हाथी मित्र दल के माध्यम से मानव-हाथी द्वंद्व की स्थिति में स्थानीय स्तर पर सहयोग और जागरूकता का कार्य किया जाता है। इसी तरह मैना मित्र दल और गिद्ध मित्र दल के सदस्य संबंधित पक्षी प्रजातियों के संरक्षण और उनके प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इन सदस्यों का सम्मान वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भूमिका को रेखांकित करता है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
हरेली बर्ड फेस्टिवल को इको-टूरिज्म के विकास से जोड़ते हुए स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। बर्ड गाइड, होम-स्टे और पर्यटन सेवाओं के साथ प्रकृति आधारित अन्य गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण और स्थानीय युवाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को देखते हुए प्रकृति आधारित पर्यटन को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा देने से क्षेत्र की पहचान को नई मजबूती मिल सकती है। साथ ही स्थानीय समुदाय को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर उन्हें अपनी आय बढ़ाने के अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं।
इस अवसर पर विधायक विनायक गोयल, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, अपर मुख्य सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे, जगदलपुर महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पर्यावरणविद, ग्रामीण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
हरेली बर्ड फेस्टिवल के माध्यम से बस्तर की जैव विविधता, पक्षी संपदा और प्राकृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया गया। आयोजन ने पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और इको-टूरिज्म के विकास के बीच बेहतर समन्वय का संदेश दिया। बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने से क्षेत्र के युवाओं और स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसर विकसित होने की संभावना है।

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