पचपेड़ी थाने के आरक्षक पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

चखना सेंटर संचालकों से 5 से 10 हजार और शराब कारोबार से जुड़े लोगों से 15 से 20 हजार रुपये लेने का दावा, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं

पचपेड़ी। पचपेड़ी थाना में पदस्थ आरक्षक रामलाल सोनवानी, बैच नंबर 842 के खिलाफ शराब कोचियों और चखना सेंटर संचालकों से कथित रूप से अवैध वसूली किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविकता सामने लाने की मांग की जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, आरक्षक पर आरोप है कि वह कथित तौर पर थाना क्षेत्र में संचालित चखना सेंटरों के संचालकों से हर महीने 5 हजार से 10 हजार रुपये तक की राशि लिए जाने की मांग करता है। वहीं, शराब के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों से कथित रूप से 15 हजार से 20 हजार रुपये तक लिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित आरक्षक का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

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अवैध कारोबार पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

स्थानीय स्तर पर इन आरोपों की चर्चा के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों से नियमित रूप से पैसे लेने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर कानून व्यवस्था और अवैध कारोबार के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर पड़ सकता है।

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है। जांच के दौरान संबंधित आरक्षक की भूमिका, थाना क्षेत्र में संचालित संदिग्ध गतिविधियों तथा लगाए गए आर्थिक लेनदेन के आरोपों की वास्तविकता की जांच की जा सकती है।

वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जांच कराने की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि किसी भी पुलिसकर्मी पर लगाए गए आरोपों को बिना जांच के सही या गलत नहीं माना जा सकता। इसलिए निष्पक्ष जांच के माध्यम से तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए।

यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित आरक्षक के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और संबंधित पुलिसकर्मी के संबंध में बनी किसी भी भ्रांति का भी निराकरण होगा।

जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविकता

फिलहाल आरक्षक रामलाल सोनवानी पर लगाए गए अवैध वसूली के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों को जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही सही या गलत माना जा सकेगा। मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच कराए जाने से आरोपों की वास्तविकता सामने आने के साथ-साथ पुलिस विभाग की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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