TET एक राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं, प्राथमिक शिक्षक से प्राचार्य तक एका दिखाएं

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रायपुर । गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग ने कहा है कि पदोन्नति में TET की बाध्यता आज हजारों शिक्षकों के भविष्य के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़ी है। यह समस्या किसी एक संगठन, एक वर्ग या एक समूह की नहीं है, बल्कि प्राथमिक शिक्षक से लेकर प्राचार्य तक सभी की सामूहिक समस्या है।

उन्होंने कहा कि TET के मुद्दे पर निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, विद्या मितान सहित सभी शिक्षक वर्गों को साथ लेकर व्यापक समन्वय एवं आपसी सहमति से आंदोलन की रणनीति तैयार करनी होगी। पहले राज्य स्तर पर और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र स्तर पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाए, तभी सरकार पर प्रभावी दबाव बनाया जा सकता है।

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नवरंग ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन या समूह के बस में नहीं है। सभी संगठनों की सामूहिक भागीदारी, आपसी समन्वय और प्रत्येक शिक्षक के हित को समान महत्व देकर ही TET की बाध्यता से मुक्ति की लड़ाई सफल हो सकती है। उन्होंने कहा कि नौकरी जाने का भय, सरकार की निष्क्रियता तथा संगठनों में एकला चलो की प्रवृत्ति आंदोलन की एकता के सामने बड़ी बाधाएं हैं। साथ ही, किसी भी संगठन की पूर्व छवि या विवादों को एकता के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।

उन्होंने बताया कि गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ अपनी भूमिका लगातार निभा रही है। 16 संगठनों से गठित शिक्षक महासंघ छत्तीसगढ़ की बैठक शीघ्र ही रायपुर में आयोजित की जाएगी, जिसमें TET की बाध्यता सहित शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक रणनीति तय की जाएगी।

नवरंग ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष माननीय चरणदास महंत द्वारा भी सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर अपनी भूमिका निभाई गई है। इससे स्पष्ट है कि TET की समस्या अब व्यापक सार्वजनिक एवं राजनीतिक विमर्श का विषय बन चुकी है।

“एका, समन्वय और संघर्ष ही मंजिल तक पहुंचाएगा”

प्रांताध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग ने शिक्षकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि TET के कारण कोई भी शिक्षक अपनी नौकरी से वंचित न हो, इसके लिए संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पदोन्नति से वंचित होने की स्थिति अलग विषय हो सकती है, लेकिन किसी भी शिक्षक की नौकरी समाप्त नहीं होनी चाहिए। शिक्षकों को भयभीत होने के बजाय संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग उठानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि समयमान वेतनमान और क्रमोन्नति शिक्षकों के अधिकार हैं। दीर्घ सेवा के बाद मिलने वाले सेवा संबंधी लाभों को भी सुरक्षित रखने के लिए संगठन पूरी मजबूती से आवाज उठाएगा।

उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों, प्राथमिक शिक्षक से लेकर प्राचार्य तक सभी शिक्षकों से अपील की कि व्यक्तिगत मतभेदों और संगठनात्मक सीमाओं से ऊपर उठकर “एक शिक्षक–एक संघर्ष–एक मांग” की भावना के साथ एकजुट हों। सामूहिक प्रयास से ही सरकार को सकारात्मक निर्णय के लिए बाध्य किया जा सकता है।

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