प्रकृति और अध्यात्म का अनूठा संगम
मांदागिरी में मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली बनेगी छत्तीसगढ़ का नया पर्यटन केंद्र
रायपुर । धमतरी जिले के वनांचल नगरी (सिहावा) क्षेत्र की प्राकृतिक और आध्यात्मिक विरासत में मेचका स्थित मांदागिरी पर्वत का विशेष महत्व है। नगरी विकासखंड के मेचका गांव के समीप मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली श्रद्धा, अध्यात्म और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में जानी जाती है। अब इस क्षेत्र की धार्मिक और प्राकृतिक महत्ता को देखते हुए मांदागिरी पर्वत को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की दिशा में योजना बनाई जा रही है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी (सिहावा) वनांचल में स्थित मांदागिरी पर्वत जल्द ही राज्य में धार्मिक, प्रकृति और साहसिक पर्यटन (ट्रेकिंग) के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बनाने जा रहा है। मेचका गांव के पास मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित पौराणिक मुचुकुंद ऋषि की यह पावन तपोस्थली श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करने के लिए तैयार की जा रही है।

पौराणिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंश के राजा मांधाता के पुत्र थे। सुर-असुर संग्राम के बाद उनकी तपस्या से जुड़ा यह स्थल सिहावा-नगरी अंचल की ‘सप्तऋषि तपोभूमि’ की आध्यात्मिक विरासत को समृद्ध करता है। मांदागिरी पर्वत पर सुंदर तालाब, प्राचीन प्रतिमाएं और माता सीता सहित देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं।

पर्वत की प्राकृतिक बनावट और आसपास फैला वन क्षेत्र इस स्थान को धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति प्रेमियों और साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए भी आकर्षक बनाता है। पहाड़ी की ऊंचाई से सोंढूर जलाशय और विस्तृत वनांचल का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यही प्राकृतिक दृश्य और पहाड़ी क्षेत्र ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए इसे संभावनाओं से भरपूर पर्यटन स्थल बनाते हैं।
मूलभूत सुविधाओं के विकास पर जोर
धमतरी के कलेक्टर ने बताया कि मांदागिरी की आध्यात्मिक और प्राकृतिक क्षमता को देखते हुए इसके समग्र विकास की योजना बनाई जा रही है। पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से पहले यहां उपलब्ध सुविधाओं और आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा। इसमें पहुंच मार्ग, स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
धार्मिक आस्था और प्राचीन विरासत का संरक्षण करते हुए क्षेत्र में ट्रेकिंग एवं एडवेंचर स्पॉट्स को भी चिन्हित किया जाएगा। इससे पर्यटकों को धार्मिक दर्शन के साथ प्राकृतिक वातावरण और साहसिक पर्यटन का अनुभव भी मिल सकेगा।
स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर
मांदागिरी पर्वत के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने से वनांचल क्षेत्र में स्थानीय समुदाय की सहभागिता बढ़ने की संभावना है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़कर गाइड, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में आय के नए साधन विकसित किए जा सकते हैं।
पर्यटन विकास के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने पर भी जोर रहेगा, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके।
इको-टूरिज्म और पिलग्रिम टूरिज्म के नक्शे पर आएगा मांदागिरी
नगरी से लगभग 27 किलोमीटर पूर्व स्थित मांदागिरी आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख इको-टूरिज्म और पिलग्रिम टूरिज्म स्थलों में अपनी पहचान बनाने की क्षमता रखता है। धार्मिक आस्था, पौराणिक विरासत, पहाड़ी क्षेत्र, वनांचल और जलाशय का प्राकृतिक दृश्य इसे विशिष्ट पर्यटन स्थल बनाते हैं।
मांदागिरी का समग्र विकास होने से सिहावा-नगरी क्षेत्र के पर्यटन को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली के रूप में धार्मिक महत्व रखने वाला यह स्थल आने वाले समय में श्रद्धालुओं, प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग के शौकीनों को एक साथ आकर्षित करने वाला नया पर्यटन केंद्र बन सकता है।

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