बिलासपुर पुलिस का साइबर जागृति अभियान, बैंक अधिकारियों के साथ हुई चर्चा-परिचर्चा
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
बिलासपुर । साइबर अपराधों की रोकथाम एवं आमजन को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस द्वारा संचालित ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत रक्षित केंद्र बिलासपुर स्थित चेतना हॉल में शहर के विभिन्न बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ चर्चा-परिचर्चा एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम उमनि/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में आयोजित हुआ। इसमें पुलिस अधिकारियों एवं बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों ने वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराध, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड तथा डिजिटल माध्यम से होने वाली ठगी की घटनाओं पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस एवं बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आमजन तक साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विचार-विमर्श किया गया।


संदिग्ध खातों पर बैंक रखें विशेष नजर
विभिन्न बैंकों से आए अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने बताया कि मल्टीपल ट्रांजेक्शन, संदिग्ध गतिविधियों एवं फर्जी केवाईसी वाले खातों पर नजर रखी जाती है। ऐसी गतिविधियां सामने आने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिस को सूचना दी जाती है। नए खाताधारकों को वेलकम कॉल के माध्यम से साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी भी दी जाती है। इसके अलावा सेवानिवृत्त एवं वरिष्ठ नागरिकों को समय-समय पर बैंक बुलाकर साइबर सुरक्षा के संबंध में आवश्यक जानकारी दी जाती है।
बिलासपुर पुलिस कप्तान ने बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ग्राहकों के खातों पर विशेष नजर रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति अथवा फर्म का खाता खोलने से पहले कागजी दस्तावेजों की जांच के साथ उसका भौतिक सत्यापन भी किया जाना चाहिए। साइबर अपराधी कई बार ऐसे खातों का उपयोग ठगी की रकम के लेन-देन के लिए करते हैं।
उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि बैंक में आने वाले ग्राहकों को नियमित रूप से साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। संदिग्ध लेनदेन अथवा साइबर ठगी की जानकारी मिलने पर पुलिस के साथ तत्काल समन्वय स्थापित करते हुए नजदीकी थाना प्रभारी को सूचित करें। पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के आपसी सहयोग से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के साथ पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

फर्जी KYC, APK और QR कोड फ्रॉड से सावधान रहने की अपील
चर्चा के दौरान फर्जी बैंक कॉल, KYC अपडेट के नाम पर ठगी, फिशिंग लिंक, फर्जी वेबसाइट एवं मोबाइल एप्लीकेशन, APK फाइल, QR कोड फ्रॉड, सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली ठगी, डिजिटल अरेस्ट, OTP, PIN, CVV एवं पासवर्ड से संबंधित साइबर अपराधों के संबंध में जानकारी साझा की गई।
आमजन से अपील की गई कि वे OTP, PIN, CVV, पासवर्ड एवं बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK अथवा संदिग्ध मोबाइल एप्लीकेशन इंस्टॉल न करें।
ठगी होने पर 1930 पर तत्काल करें शिकायत
कार्यक्रम में साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की राशि को होल्ड कराने तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई में सहायता मिल सकती है।
नुक्कड़-नाटक से भी दिया जाएगा साइबर सुरक्षा का संदेश
बिलासपुर पुलिस द्वारा नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाने और जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नुक्कड़-नाटक कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई है। शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों, चौक-चौराहों, मॉल एवं बाजार परिसरों में नुक्कड़-नाटक के माध्यम से नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव का संदेश दिया जाएगा।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि साइबर अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस, बैंकिंग संस्थानों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित एवं साइबर अपराध मुक्त डिजिटल समाज का निर्माण संभव है।
इस दौरान उपस्थित लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से बिलासपुर पुलिस द्वारा आयोजित साइबर जागृति प्रश्नोत्तरी में हिस्सा लिया और प्रश्नों के उत्तर देकर अपने ई-मेल पर प्रमाण पत्र भी प्राप्त किए।
कार्यक्रम में उमनि/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज कुमार पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) रामगोपाल करियारे सहित बिलासपुर शहर के विभिन्न बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
“जागरूक बनें, सतर्क रहें—साइबर अपराध से सुरक्षित रहें।”
— बिलासपुर पुलिस

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