लोहारसी में धूमधाम से निकली भोजली मैया की रैली, हजारों ग्रामीण हुए शामिल
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
पचपेड़ी। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़े पारंपरिक भोजली पर्व के अवसर पर ग्राम लोहारसी में महिला सेवा समिति की दीदियों द्वारा भोजली मैया की भव्य रैली निकाली गई। रक्षाबंधन के अगले दिन मनाए जाने वाले इस पारंपरिक पर्व को लेकर गांव में विशेष उत्साह देखने को मिला। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने भोजली मैया को लेकर रैली निकाली, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

भोजली छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकपर्व है, जिसे भाई-बहन के स्नेह, आपसी भाईचारे, मित्रता और कृषि संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है। पर्व के दौरान धान सहित विभिन्न अनाजों के बीज बोकर उन्हें कुछ दिनों तक उगाया जाता है। तैयार हुई हरी भोजली की पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं और युवतियां पारंपरिक भोजली गीत गाते हुए इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाती हैं।

लोहारसी में भी महिला सेवा समिति की सदस्यों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली मैया की पूजा की। इसके बाद गांव के प्रमुख मार्गों से भोजली रैली निकाली गई। रैली के दौरान पारंपरिक गीतों और उत्सवी माहौल से पूरा गांव भक्तिमय एवं सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया। ग्रामीणों ने जगह-जगह रैली का स्वागत किया और भोजली पर्व की खुशियां साझा कीं।
भाईचारे और मित्रता का संदेश
भोजली पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है। परंपरा के अनुसार भोजली को एक-दूसरे को देकर आपसी प्रेम, मित्रता और सद्भाव की भावना मजबूत की जाती है। पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और कृषि संस्कृति से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है।
महिला सेवा समिति की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम में जनपद सदस्य राकेश शर्मा, उपसरपंच रामगोपाल साहू, अकेश कोसले, भारतीय साहू, सरोज गोस्वामी, धनंजय साहू, देव साहू एवं चित्राखण साहू सहित ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आयोजन महिला सेवा समिति लोहारसी द्वारा किया गया। समिति की अहिल्या साहू, प्रेमलता साहू, कौशल्या साहू, माधुरी साहू, गौरी साहू, गंगोत्री साहू, लक्ष्मी साहू, बिरसपति साहू, फुलेश्वरी साहू, रजनी साहू, गोदावरी साहू, सरस्वती साहू, रामकुमारी साहू एवं संतोषी साहू सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई।
महिला सेवा समिति और ग्रामीणों ने कहा कि भोजली जैसे पारंपरिक त्योहार छत्तीसगढ़ की पहचान हैं। इन्हें सामूहिक रूप से मनाने से लोक संस्कृति और परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती हैं। लोहारसी में आयोजित भोजली मैया रैली ने इसी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया।

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