मानिक चौरी और सुकुलकारी में भव्यता के साथ मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

झांकियों, भजन-कीर्तन और मटका फोड़ प्रतियोगिता ने बांधा समां, हजारों ग्रामीण हुए शामिल

मस्तूरी (बिलासपुर)। ग्राम पंचायत मानिक चौरी एवं ग्राम पंचायत सुकुलकारी में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अभूतपूर्व भव्यता, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। पूरा क्षेत्र ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा, हर ओर भक्तिमय माहौल देखने को मिला।

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कार्यक्रम के दौरान मनमोहक झांकियों, संगीतमय भजन-कीर्तन और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। छोटे-छोटे बच्चों ने राधा-कृष्ण, बाल गोपाल और ग्वाल-बाल के रूप में सजीव अभिनय प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। देर रात तक मटका फोड़ प्रतियोगिता का कार्यक्रम चलता रहा। जैसे ही मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, मंदिरों में घंटों-घड़ियालों की गूंज और भक्तों के जयकारों से वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया।

इस पावन अवसर पर अतिथि विधायक दिलीप लहरिया, चंद्रप्रकाश सूर्या (प्रदेश महामंत्री, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा) ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, सत्य के मार्ग पर चलने और समाज में सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया।

चंद्रप्रकाश सूर्या इसके पहले ग्राम पंचायत सुकुलकारी में राधा कृष्ण के मंदिर में जाकर पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया एवं प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में खिलावन पटेल (जिला पंचायत सभापति प्रतिनिधि) एवं नरेंद्र नायक की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने क्षेत्रवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे को सुदृढ़ करते हैं।

कार्यक्रम में विशेष रूप से सरपंच रामायण साहू, केदार साहू, विजय नायक, नारद नायक, दिलहरण साहू, गौतम नायक, राकेश नायक, जीवन नायक, दसेराम सोनवानी, मनोज साहू, विजय नेताम, लक्ष्मण चतुरवानी, दशहरा राम सोनवानी, वीरेंद्र पूरेना, अनिल जायसवाल, साहिल मधुकर, सरजू साहू, मेडी यादव, नवीन, नरेंद्र मरकाम, लोकनाथ बंजारे, रुद्रांश सूर्या, आदि हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

मानिक चौरी और सुकुलकारी में आयोजित यह जन्मोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर गया।

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