सीडीबीई विवाद में पंजीयक के आदेश पर स्थगन, स्कूलों में हस्तक्षेप को लेकर उठे सवाल

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वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अपीलीय प्राधिकारी ने 13 जुलाई के आदेश पर लगाई रोक, संस्था के संचालन और कर्मचारियों की आजीविका को माना महत्वपूर्ण

रायपुर । छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CDBE) से जुड़े विवाद में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप सचिव एवं अपीलीय प्राधिकारी उमेश कुमार पटेल ने पंजीयक, फर्म एवं संस्थाएं द्वारा 13 जुलाई 2026 को पारित आदेश के प्रभाव पर 7 सितंबर 2026 को स्थगन प्रदान किया है। यह आदेश LAW/3815/2026 के तहत जारी किया गया है।

अपीलीय प्राधिकारी के आदेश में संस्था के अनवरत संचालन के साथ लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों की आजीविका को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। आदेश के बाद सीडीबीई से जुड़े विवाद में एक बार फिर समिति की वैधता, चुनाव प्रक्रिया, संस्था के संचालन तथा विभिन्न स्कूलों में अधिकार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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मिली जानकारी के अनुसार, पंजीयक के 13 जुलाई के आदेश के विरुद्ध शशि बाला बाधे एवं रेव्ह. अतुल आर्थर द्वारा 3 अगस्त 2026 को अपील प्रस्तुत की गई थी। अपील के साथ प्रश्नाधीन आदेश के प्रभाव को स्थगित रखने के लिए अंतरिम आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था। इसी अंतरिम आवेदन पर सुनवाई के बाद अपीलीय प्राधिकारी ने 7 सितंबर को स्थगन आदेश जारी किया।

13 जुलाई के आदेश को लेकर क्या था विवाद

बताया गया है कि छत्तीसगढ़ डायोसिस से संबंधित समिति और उसके संचालन को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच 27 मार्च 2026 को सीडीबीई का चुनाव कराए जाने की बात सामने आई। अपीलार्थी पक्ष का आरोप है कि उक्त चुनाव संस्था के विधान एवं नियमों के अनुरूप नहीं कराया गया तथा चुनाव प्रक्रिया में संबंधित पक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

इसी चुनाव के आधार पर गठित समिति की सूची को फर्म एवं संस्थाएं कार्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया। इसके बाद पंजीयक, फर्म एवं संस्थाएं द्वारा 13 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया गया।

अपीलार्थी पक्ष ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए शासन के समक्ष अपील दायर की। साथ ही यह भी बताया कि मामले से संबंधित विषय उच्च न्यायालय में WPC 1362/2026 के रूप में लंबित है।

स्कूलों के संचालन में हस्तक्षेप का आरोप

अपीलार्थी पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान यह आरोप लगाया गया कि पंजीयक के 13 जुलाई के आदेश को आधार बनाकर सीडीबीई के कथित पदाधिकारियों द्वारा प्रदेश के विभिन्न स्कूलों के संचालन में हस्तक्षेप किया गया।

आरोप के अनुसार, इस दौरान वर्षों से स्कूलों में कार्यरत प्राचार्यों, शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन अथवा सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई की गई। अपीलार्थी पक्ष ने करीब 41 कर्मचारियों के प्रभावित होने का दावा किया है।

इन कर्मचारियों में शिक्षक, प्राचार्य तथा अन्य कर्मचारी शामिल बताए गए हैं। अपीलार्थी पक्ष का कहना है कि संबंधित कर्मचारी लंबे समय से संस्था में अपनी सेवाएं दे रहे थे और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई।

हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित पक्ष का अंतिम पक्ष अथवा प्रत्येक कर्मचारी की सेवा स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी कर्मचारी की बर्खास्तगी या निलंबन को स्वतः अवैध अथवा समाप्त मानने से पहले संबंधित आदेश एवं सक्षम प्राधिकारी के अंतिम निर्णय को देखना आवश्यक होगा।

सुनवाई में उत्तरवादी पक्ष नहीं हुआ उपस्थित

शासन के 7 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, प्रकरण की सुनवाई के संबंध में उत्तरवादियों को पंजीकृत डाक के माध्यम से सूचना दी गई थी। निर्धारित सुनवाई के दौरान उत्तरवादी उपस्थित नहीं हुए।

इसके चलते अंतरिम आवेदन पर सुनवाई उत्तरवादी पक्ष की अनुपस्थिति में की गई। अपीलार्थियों की ओर से सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा गया कि पंजीयक के आदेश के आधार पर की जा रही आगे की कार्रवाई से संस्था के संचालन पर असर पड़ रहा है तथा लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

अपीलीय प्राधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों और प्रस्तुत तथ्यों का अवलोकन करने के बाद अंतरिम राहत के प्रश्न पर विचार किया।

संस्था का संचालन और कर्मचारियों की आजीविका बनी अहम आधार

अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश में संस्था के अनवरत संचालन तथा लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों की आजीविका को महत्वपूर्ण माना गया। आदेश में सुविधा के संतुलन को अपीलार्थियों के पक्ष में पाए जाने का उल्लेख करते हुए पंजीयक, फर्म एवं संस्थाएं द्वारा 13 जुलाई 2026 को पारित आदेश के प्रभाव पर स्थगन प्रदान किया गया।

इस आदेश के बाद फिलहाल 13 जुलाई के पंजीयक आदेश को आधार बनाकर आगे की जाने वाली कार्रवाई पर महत्वपूर्ण कानूनी एवं प्रशासनिक प्रश्न खड़े हो गए हैं।

क्या 41 कर्मचारियों की बर्खास्तगी स्वतः खत्म हो गई?

स्थगन आदेश सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल कर्मचारियों की सेवा से जुड़ी कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। अपीलार्थी पक्ष का कहना है कि यदि 13 जुलाई के पंजीयक आदेश पर ही स्थगन लगा दिया गया है और बाद की कार्रवाई उसी आदेश को आधार बनाकर की गई थी, तो ऐसी कार्रवाई की वैधता पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।

अपीलार्थी पक्ष का दावा है कि 27 मार्च को गठित कथित समिति द्वारा लिए गए निर्णयों तथा उसके आधार पर की गई कार्रवाई पर भी इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि, उपलब्ध 7 सितंबर के स्थगन आदेश में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है कि करीब 41 कर्मचारियों की बर्खास्तगी स्वतः निरस्त हो गई है अथवा बाद में लिए गए सभी निर्णय स्वतः शून्य हो गए हैं। इसलिए कर्मचारियों की बहाली, निलंबन या बर्खास्तगी आदेशों की वैधता और समिति द्वारा लिए गए अलग-अलग निर्णयों का अंतिम प्रभाव संबंधित सेवा आदेशों, संस्था के नियमों तथा सक्षम न्यायिक या प्रशासनिक प्राधिकारी के आगामी निर्णय पर निर्भर करेगा।

स्कूलों में अधिकार को लेकर भी बढ़ी अहमियत

सीडीबीई से जुड़े विवाद का असर केवल समिति के गठन तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध विभिन्न स्कूलों के प्रशासनिक संचालन और वहां कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों से भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

स्थगन आदेश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूलों के संचालन में किस पक्ष की क्या भूमिका रहेगी और पंजीयक के आदेश को आधार बनाकर पूर्व में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।

अपीलार्थी पक्ष का कहना है कि स्थगन से वर्षों से संस्था में काम कर रहे कर्मचारियों के हितों की रक्षा का रास्ता खुला है। वहीं, मूल विवाद के अंतिम निराकरण के लिए समिति की वैधता, चुनाव प्रक्रिया और संस्था के विधान की व्याख्या जैसे प्रश्नों का समाधान होना अभी बाकी है।

हाईकोर्ट में लंबित मामले पर भी निगाह

मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद से संबंधित विषय उच्च न्यायालय में WPC 1362/2026 के रूप में लंबित है। ऐसे में शासन के अपीलीय प्राधिकारी द्वारा दिया गया 7 सितंबर का आदेश फिलहाल अंतरिम प्रकृति का है।

इस आदेश को सीडीबीई समिति की वैधता अथवा चुनाव विवाद पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अंतिम स्थिति न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यवाही के आगामी परिणामों से स्पष्ट होगी।

आदेश की प्रतिलिपि पंजीयक को भेजी गई

उप सचिव एवं अपीलीय प्राधिकारी उमेश कुमार पटेल द्वारा डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित आदेश 7 सितंबर 2026 को जारी किया गया। आदेश की प्रतिलिपि वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के मंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी तथा पंजीयक, फर्म एवं संस्थाएं, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

फिलहाल क्या स्थिति

फिलहाल 7 सितंबर के आदेश के बाद 13 जुलाई 2026 के पंजीयक आदेश के प्रभाव पर स्थगन है। हालांकि, इससे सीडीबीई समिति की वैधता, 27 मार्च के चुनाव की प्रक्रिया, विभिन्न स्कूलों में समिति के अधिकार और कर्मचारियों के संबंध में पूर्व में की गई कार्रवाई पर अंतिम निर्णय नहीं हो गया है।

अब आगे की प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यवाही में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि स्थगन का प्रभाव किन-किन बाद की कार्रवाइयों पर पड़ता है और प्रभावित कर्मचारियों की सेवा संबंधी स्थिति क्या रहती है। इस मामले में संबंधित पक्षों की ओर से आने वाले आदेश और उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण की कार्यवाही पूरे विवाद की आगे की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है।

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