किसानों को MSP दिलाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह का सख्त रूख, NAFED-NCCF को लक्ष्य आधारित खरीद के दिए निर्देश
“किसान MSP से नीचे उपज बेचने को मजबूर न हो” : उपार्जन समीक्षा बैठक में शिवराज सिंह चौहान का कड़ा संदेश
उपार्जन में ढिलाई बर्दाश्त नहीं, 72 घंटे में भुगतान और जिला-स्तरीय लक्ष्य तय करने के शिवराज सिंह ने दिए निर्देश
किसान हित सर्वोपरि: शिवराज सिंह ने NAFED-NCCF से कहा- जहां दाम कम हों वहां तुरंत प्रभावी खरीद करें
दलहन-तिलहन मिशन को गति देने के लिए शिवराज का एक्शन मोड, राज्यों की बाधाएं दूर कराने का भरोसा
नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में NAFED और NCCF के साथ उपार्जन संबंधी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जहां बाजार भाव MSP से नीचे हैं, वहां किसानों से प्रभावी और समयबद्ध खरीद हर हाल में सुनिश्चित की जाए। कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दोटूक कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में किसान को उसकी उपज का न्यायसंगत मूल्य दिलाना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता है और इस लक्ष्य में किसी भी स्तर की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन में NAFED और NCCF की उपार्जन प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपार्जन को केवल औपचारिक स्वीकृति के रूप में नहीं, बल्कि किसानों को MSP का लाभ दिलाने वाले मिशन मोड दायित्व के रूप में लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि बाजार में कीमतें MSP से नीचे चल रही हैं और फिर भी खरीद अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रही है, तो यह स्थिति किसानों के हित में नहीं मानी जा सकती। मंत्री श्री चौहान ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि एजेंसियां अपने-अपने जिलों और केंद्रों के स्तर पर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण करें। उन्होंने कहा कि राज्यवार आवंटन के साथ-साथ जिला-स्तर पर उत्पादन, संभावित आवक और 25 प्रतिशत खरीद क्षमता का आकलन कर ठोस कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि उपार्जन का लक्ष्य वास्तविक जमीन पर हासिल हो सके।
शिवराज सिंह चौहान ने दलहन-तिलहन, विशेषकर चना, मसूर, उड़द और सरसों जैसी फसलों पर विशेष फोकस करते हुए कहा कि जहां किसानों को MSP से कम दाम मिल रहे हैं, वहां खरीद में तेजी लाना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उपार्जन केंद्रों की संख्या, खरीद क्षमता, जिला-स्तरीय बाधाएं, राज्य सरकारों के निर्देश, गुणवत्ता संबंधी स्थानीय समस्याएं और भुगतान व्यवस्था इन सभी पहलुओं की रोजाना निगरानी की जाए और जहां भी बाधा हो, उसका समाधान तत्काल केंद्रीय स्तर पर रखा जाए।
मसूर उपार्जन की समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने राज्यों में वास्तविक बाजार भाव की ताजा जानकारी जुटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां कीमतें MSP के आसपास या नीचे हैं, वहां खरीद तंत्र और अधिक चुस्त किया जाए।
श्री चौहान ने किसानों को समय पर भुगतान को अत्यंत संवेदनशील विषय बताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि भुगतान व्यवस्था को तेज, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। समीक्षा में यह मुद्दा सामने आया कि किसानों को भुगतान में विलंब की शिकायतें हैं, जिस पर मंत्री ने 72 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त SOP तैयार करने और राज्यों से चर्चा कर इसे प्रभावी रूप से लागू करने को कहा।
बैठक में राज्य पोर्टलों और CNA पोर्टल के एकीकरण, भुगतान में देरी, बिहार में DBT व्यवस्था की कमी, गुजरात में भुगतान विलंब, महाराष्ट्र में डेटा लंबित रहने और आंध्र प्रदेश से अतिरिक्त मात्रा के लिए आंकड़े प्राप्त होने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यदि किसी राज्य के निर्देश, प्रक्रियाएं या स्थानीय प्रशासनिक अड़चनें किसानों से खरीद में बाधा बन रही हैं, तो केंद्र सरकार सक्रिय समन्वय के जरिए उनका समाधान सुनिश्चित करेगी।
श्री चौहान ने यह भी कहा कि दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने का राष्ट्रीय लक्ष्य तभी सफल होगा, जब किसानों को यह भरोसा होगा कि जरूरत पड़ने पर उनकी उपज MSP पर खरीदी जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की मंशा स्पष्ट है- किसान को संकट में नहीं छोड़ना है, बल्कि उसे उचित मूल्य, त्वरित भुगतान और प्रभावी खरीद तंत्र के माध्यम से मजबूत समर्थन देना है।
मंत्री शिवराज सिंह ने NAFED और NCCF को निर्देशित किया कि वे उपार्जन को लेकर बेहतर काम करें, समस्याओं की सूची बनाकर समाधान सहित प्रस्तुत करें और शेष अवधि में खरीद प्रदर्शन में ठोस सुधार दिखाएं। उन्होंने कहा कि किसान हित में केंद्र सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है और उपार्जन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।

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