केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू स्वच्छ भारत मिशन-Urban 2.0 की राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में सम्मिलित हुए

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रायपुर को जीरो डंप-साइट उपलब्धि एवं वैज्ञानिक लैंडफिल प्रबंधन के लिए सराहा गया

सीवेज ट्रीटमेंट एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणालियों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करें राज्य :  तोखन साहू

नई दिल्ली । नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में  केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल जी की अध्यक्षता तथा आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित स्वच्छ भारत मिशन-Urban की राष्ट्रीय समीक्षा बैठक के दूसरे दिन एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, लेगेसी वेस्ट रिमेडिएशन, शहरी स्वच्छता, स्वच्छ सर्वेक्षण, उत्तर-पूर्वी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की चुनौतियों तथा नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक के दौरान राज्य मंत्री तोखन साहू ने सीवेज उपचार संयंत्र के प्रभावी संचालन एवं उपयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के प्रवास के दौरान यह देखा गया कि कई स्थानों पर सीवेज शोधन संयंत्र स्थापित होने के बावजूद उनका समुचित उपयोग नहीं हो रहा है, जिसके कारण बिना उपचारित जल नदियों में छोड़ा जा रहा है। उन्होंने राज्यों एवं शहरी निकायों को निर्देशित किया कि उपलब्ध अधोसंरचना की कार्यक्षमता सुनिश्चित करते हुए सीवेज प्रबंधन प्रणालियों का प्रभावी संचालन किया जाए।

बैठक में विभिन्न राज्यों द्वारा शहरी स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की भी सराहना की गई। छत्तीसगढ़ के स्वच्छता मॉडल को 100 प्रतिशत महिला नेतृत्व आधारित मॉडल के रूप में प्रशंसित किया गया, वहीं रायपुर शहर को जीरो डंप-साइट जोन घोषित किए जाने तथा वैज्ञानिक लैंडफिल प्रबंधन एवं लेगेसी वेस्ट रिमेडिएशन की अभिनव पहलों के लिए विशेष रूप से सराहा गया।

सत्र के दौरान अमृतसर द्वारा मौसमी एवं तैरते कचरे के प्रबंधन, नवी मुंबई द्वारा एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल, तथा पटना द्वारा द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी शहरों में वित्तीय व्यवहार्यता से जुड़ी चुनौतियों एवं एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं के अनुभव साझा किए गए।

‘स्वच्छता तक पहुंच, खुले में शौच मुक्त वातावरण (ODF++) की ओर संक्रमण और मशीनीकृत गाद निकासी’ विषयक सत्र में उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने “मैनहोल से मशीन होल तक” की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए मैनहोल में मानव प्रवेश समाप्त करने हेतु तकनीक आधारित व्यवस्थाओं एवं संभावित कानूनी उपायों पर बल दिया। इस सत्र में सुरक्षित एवं तकनीक-आधारित स्वच्छता प्रणालियों, गरिमापूर्ण स्वच्छता सेवा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार पर व्यापक चर्चा हुई।

मध्यप्रदेश ने सुरक्षित स्वच्छता संबंधी नीतिगत पहलों, देवास ने मैकेनाइज्ड सीवर सफाई मॉडल, ओडिशा ने गरिमा पहल के अंतर्गत स्वच्छता कर्मियों के कल्याण, तथा पंजाब ने ODF++ शहरों के निर्माण हेतु एकीकृत स्वच्छता प्रबंधन के अनुभव साझा किए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने जानकारी दी कि नमस्ते योजना के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों के लिए मैकेनाइज्ड डीस्लजिंग, कौशल विकास, सुरक्षा उपकरण एवं वित्तीय सहायता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल एवं राज्य मंत्री तोखन साहू ने उत्तर-पूर्वी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्र विशेष की चुनौतियों एवं समाधान पर भी विस्तृत चर्चा की। इसमें विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यटन आधारित स्वच्छता मॉडल एवं सतत शहरी विकास की रणनीतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

केंद्रीय मंत्रियों ने शहरी स्वच्छता एवं सफाई अभियानों को सफल बनाने के लिए मजबूत राजनीतिक नेतृत्व एवं सक्रिय जनभागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान को भी दोहराया, जिसमें कोविड काल की उपयोगी व्यवस्थाओं—जैसे घर से काम, ऑनलाइन कक्षाएं, वर्चुअल मीटिंग एवं पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी—को पुनः अपनाने की बात कही गई है, ताकि पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण को गति मिल सके।

राष्ट्रीय समीक्षा बैठक ने स्वच्छ भारत मिशन-Urban 2.0 के अंतर्गत स्वच्छ, हरित एवं सतत शहरी विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। बैठक में हुए विचार-विमर्श को आगामी 28 मई 2026 को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली PRAGATI समीक्षा बैठक की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया।

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