कान्स फिल्म फेस्टिवल में गूंजेगा अनुप्रिया गोयनका का अभिनय: मंटो की ‘हतक’ पर बनी फिल्म ‘बॉम्बे स्टोरीज’ में निभा रहीं सेक्स वर्कर का चुनौतीपूर्ण किरदार
एक्ट्रेस बोलीं- “इच्छा से सेक्स वर्क चुनना व्यक्ति का अधिकार, समाज को जज करने का हक नहीं”; मौनी रॉय और सुष्मिता सिंह भी मुख्य भूमिकाओं में
मुंबई। बॉलीवुड की प्रतिभाशाली अभिनेत्री अनुप्रिया गोयनका इन दिनों अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई गलियारों से लेकर मायानगरी तक लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। उनकी आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बॉम्बे स्टोरीज’ प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) में प्रदर्शित की जा रही है। किसी भी भारतीय कलाकार के लिए वैश्विक मंच कान्स तक पहुंचना एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता है और अनुप्रिया के लिए यह मौका इसलिए भी बेहद खास है, क्योंकि यह उनके करियर की पहली इंडिपेंडेंट (स्वतंत्र) फिल्म है।
मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो की कहानी से प्रेरित है फिल्म
इस खास फिल्म का निर्देशन जाने-माने निर्देशक राहत शाह काजमी ने किया है। फिल्म की पटकथा उर्दू के मशहूर और बेबाक लेखक सआदत हसन मंटो की चर्चित कहानी ‘हतक’ से प्रेरित है। ‘बॉम्बे स्टोरीज’ में समाज के उस हाशिए पर खड़े हिस्से की कड़वी सच्चाई को पर्दे पर उतारा गया है, जिसके बारे में अक्सर लोग मुख्यधारा में खुलकर बात करने से कतराते हैं। फिल्म में अनुप्रिया गोयनका एक सेक्स वर्कर के बेहद संवेदनशील और दमदार किरदार में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में उनके साथ ग्लैमरस एक्ट्रेस मौनी रॉय और सुष्मिता सिंह भी बेहद अहम और मजबूत भूमिकाएं निभा रही हैं।
अपमान और आत्मसम्मान के बीच झूलती ‘सौगंधी’ की दास्तान
अपने इस अनूठे किरदार के बारे में बात करते हुए अनुप्रिया गोयनका ने बेहद भावुक होकर कहा:
“मैं लंबे समय से इंडिपेंडेंट सिनेमा का हिस्सा बनने की इच्छा रख रही थी। मुझे इस बात का बहुत गर्व और खुशी है कि मेरी पहली इंडिपेंडेंट फिल्म महान लेखक मंटो की कहानी पर आधारित है। ‘हतक’ शब्द का सीधा मतलब ‘अपमान’ होता है और पूरी फिल्म की कहानी भी इसी मानवीय भावना के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म में मेरा किरदार ‘सौगंधी’ नाम की महिला का है, जो समाज के तीखे नजरों, तानों और लोगों के फैसलों (जजमेंट) के बीच खुद के अस्तित्व और आत्मसम्मान को समझने की जद्दोजहद करती है।”
एक्ट्रेस ने आगे विस्तार से सौगंधी के चरित्र को समझाते हुए कहा कि वह एक ऐसी महिला है, जिसने परिस्थितियों के चलते अपनी जिंदगी को उसी रूप में स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन उसके दिल के किसी कोने में आज भी सच्चा प्यार और सम्मान पाने की गहरी चाहत है। वह चाहती है कि समाज या कोई भी पुरुष उसे सिर्फ एक उपभोग की वस्तु या शरीर की नजर से न देखे, बल्कि उसे एक इंसान और एक गरिमामय महिला के रूप में महसूस करे। अनुप्रिया ने माना कि इस किरदार को जीने के दौरान उन्हें एक महिला के कई अनछुए और गहरे पहलुओं को समझने का मौका मिला।
सेक्स वर्क पर अनुप्रिया का बेबाक नजरिया: “मजबूरी और शोषण गलत, इच्छा है तो मिले सम्मान”
इंटरव्यू के दौरान अनुप्रिया गोयनका ने समाज में सेक्स वर्क को लेकर व्याप्त रूढ़िवादी सोच पर भी अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:
“अगर कोई वयस्क व्यक्ति अपनी पूरी इच्छा और मर्जी से इस काम को चुनता है, तो यह उसका व्यक्तिगत अधिकार और फैसला है। ऐसे में इसे किसी भी अन्य सामान्य पेशे या नौकरी की तरह ही देखा जाना चाहिए। समाज को उनके प्रति अपना नजरिया बदलना होगा।”हालांकि, इसके दूसरे स्याह पहलू पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि समस्या तब गंभीर और दुखद हो जाती है, जब किसी मासूम लड़की या महिला को उसकी मर्जी के खिलाफ, मजबूरी में या तस्करी (ट्रैफिकिंग) के जरिए इस गंदे दलदल में धकेला जाता है, जहां उसके सारे बुनियादी अधिकार छीन लिए जाते हैं।
अनुप्रिया ने अंत में समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि सेक्स वर्कर्स को अक्सर सिर्फ एक वस्तु समझ लिया जाता है, जबकि उनके भीतर भी भावनाएं, सपने और दर्द होता है। जब तक कोई अपनी मर्जी से काम कर रहा है, तब तक समाज को उसे जज करने या उसका अपमान करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। कान्स में फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर पूरी टीम बेहद उत्साहित है।

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