व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा निरस्त, जिला स्तरीय समिति ने लिया बड़ा फैसला

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पटवारी की पत्नी को मिला था वन अधिकार पत्र, ग्राम सभा प्रस्ताव के बाद हुई कार्रवाई

बीजापुर । जिले में व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा निरस्तीकरण का एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने ग्राम कुटरू निवासी साधना चिड़ियाम का व्यक्तिगत वन अधिकार (आईएफआर) मान्यता पत्र निरस्त कर दिया है। साधना चिड़ियाम एक पटवारी की पत्नी बताई जा रही हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार साधना चिड़ियाम, पति भानुप्रताप चिड़ियाम को अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत ग्राम कुटरू के खसरा एवं वन कम्पार्टमेंट नंबर 49/2 की 2.023 हेक्टेयर भूमि पर व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया गया था।

ग्राम सभा प्रस्ताव के बाद शुरू हुई प्रक्रिया

जानकारी के अनुसार उक्त वन अधिकार पट्टे को निरस्त करने के लिए ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद प्रस्ताव को उपखंड स्तरीय वन अधिकार समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से अनुमोदन मिलने के बाद मामला जिला स्तरीय वन अधिकार समिति को भेजा गया।

एक अप्रैल 2026 को आयोजित जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की बैठक में पूरे मामले की समीक्षा की गई। समिति द्वारा तथ्यों और अनुशंसाओं पर विचार करने के बाद पूर्व में जारी व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

14 मई को जारी हुआ आदेश

कलेक्टर एवं जिला स्तरीय वन अधिकार समिति के अध्यक्ष की ओर से इस संबंध में 14 मई 2026 को आदेश जारी किया गया। आदेश की प्रतिलिपि डीएफओ बीजापुर, जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम भैरमगढ़, अधीक्षक भू-अभिलेख तथा तहसीलदार भैरमगढ़-कुटरू को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

क्या होता है व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र

वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों को वन भूमि पर खेती एवं उपयोग का अधिकार प्रदान किया जाता है। पात्र हितग्राहियों को व्यक्तिगत वन अधिकार (आईएफआर) मान्यता पत्र जारी किया जाता है, जिससे वे संबंधित भूमि का वैधानिक उपयोग कर सकें।

हालांकि नियमों के उल्लंघन, गलत जानकारी या समिति की अनुशंसा के आधार पर जिला स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा ऐसे अधिकार पत्रों को निरस्त भी किया जा सकता है।

मामले को लेकर चर्चाओं का दौर

पटवारी की पत्नी से जुड़े इस मामले में वन अधिकार पट्टा निरस्त होने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय स्तर पर इसे प्रशासनिक प्रक्रिया और वन अधिकार कानून के अनुपालन से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों में नियमों एवं समिति की अनुशंसाओं के आधार पर कार्रवाई की जाती है।

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