अबूझमाड़ के घने जंगलों से निकलकर शहर तक पहुंची ‘वय वंदना योजना’

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स्वास्थ्य विभाग ने रच दिया इतिहास, सभी 1530 पात्र बुजुर्गों के बने कार्ड
रायपुर । अदम्य इच्छाशक्ति, सेवा का अटूट संकल्प और दुर्गम पहाड़ियों को लांघने का जज्बा हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं रह जाता। नारायणपुर जिले के स्वास्थ्य विभाग ने कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है। कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के नेतृत्व में, विभाग ने घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम अबूझमाड़ के अंतिम छोर पर बैठे बुजुर्गों तक पहुंचकर 100 फीसदी ‘वय वंदना कार्ड’ बनाने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिले के सभी 1530 पात्र हितग्राहियों को इस योजना का शत-प्रतिशत लाभ दे दिया गया है।
      यह सिर्फ एक प्रशासनिक आंकड़े की बाजीगरी नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के उन वनांचलों तक सरकार की संवेदनशीलता को पहुंचाने की एक जीवंत दास्तान है, जहाँ कभी कदम रखना भी चुनौती माना जाता था।
जब नेटवर्क ने छोड़ा साथ, तो कर्मचारियों ने थाम लिया हाथ
       नारायणपुर जिला अपनी भौगोलिक विषमताओं और लंबे समय से नक्सल प्रभावित होने के कारण हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। अबूझमाड़ के कई अंदरूनी इलाके ऐसे हैं, जहाँ आज भी आधुनिक सुविधाएं और मोबाइल नेटवर्क कोसों दूर हैं। ‘वय वंदना कार्ड’ बनाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया की जरूरत थी, लेकिन नेटवर्क न होना इस राह का सबसे बड़ा रोड़ा बन गया। ऐसे वक्त में स्वास्थ्य विभाग के जमीनी जांबाजों ने हार नहीं मानी। जहाँ नेटवर्क नहीं मिला, वहाँ कर्मचारियों ने खुद पहल की और बुजुर्ग हितग्राहियों को सुरक्षित तरीके से नेटवर्क वाले क्षेत्रों तक लेकर आए, ताकि उनका रजिस्ट्रेशन हो सके और कोई भी बुजुर्ग इस सुरक्षा कवच से महरूम न रह जाए।
नदी-नाले पार किए, मीलों पैदल चलने ‘तैयार’ कदम
       इस महाअभियान की सफलता के पीछे स्वास्थ्य अमले, मितानिनों और फील्ड कर्मचारियों की पैरों के छाले और पसीने की बूंदें छिपी हैं। शहरी क्षेत्रों में तो वार्ड स्तर पर शिविर लगाकर काम आसान कर लिया गया, लेकिन असली परीक्षा अबूझमाड़ के गांवों में थी। विभागीय टीमों को घने जंगलों के बीच मीलों का सफर पैदल तय करना पड़ा। रास्ते में उफनते नदी-नालों और सीमित संसाधनों की चुनौतियों को मात देते हुए ये कर्मचारी गांव-गांव, घर-घर पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ लोगों को ‘वय वंदना योजना’ के प्रति जागरूक किया, बल्कि खुद खड़े होकर जरूरी दस्तावेज भी जुटाए।
हर दिन की मॉनिटरिंग और मजबूत इच्छाशक्ति का नतीजा
     स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि शासन की मंशानुसार समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाना उनका सर्वोच्च संकल्प था। इसके लिए जिले में लगातार जमीनी स्तर पर अभियान की निगरानी की गई। विभागीय अधिकारियों द्वारा हर दिन प्रगति की समीक्षा की गई और मैदानी टीमों को आ रही दिक्कतों को तुरंत दूर कर मार्गदर्शन दिया गया।
अंतिम व्यक्ति तक न्याय: ग्रामीणों ने जताया आभार
     इस अभूतपूर्व सफलता पर नारायणपुर के स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग की पीठ थपथपाई है। ग्रामीणों का कहना है कि सुदूर और पहुंचविहीन क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए यह कार्ड एक बड़ी राहत लेकर आया है। प्रशासनिक संवेदनशीलता और स्वास्थ्य अमले के इस अपनेपन ने आदिवासियों के दिलों को जीत लिया है।
अंतिम व्यक्ति’ तक पहुंची तरक्की
      नारायणपुर की यह कामयाबी देश के सामने एक मिसाल है कि अगर प्रशासनिक नीतियां संवेदनशील हों और अमला समर्पित, तो घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के पार बैठे देश के ‘अंतिम व्यक्ति’ तक भी तरक्की और सुरक्षा का उजाला फैलाया जा सकता है।

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