हैंडओवर से पहले ही दरक गया नया तहसील भवन, पचपेड़ी में निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

पचपेड़ी (बिलासपुर)। बिलासपुर जिले के पचपेड़ी तहसील क्षेत्र में निर्माणाधीन नए तहसील कार्यालय भवन को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड (गृह निर्माण मंडल) द्वारा बनाए जा रहे इस सरकारी भवन में हैंडओवर से पहले ही जगह-जगह बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। निर्माण पूरा होने से पहले ही भवन की दीवारों का इस तरह दरकना निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों के अनुसार, भवन निर्माण में शुरू से ही गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही थी। आरोप है कि निर्माण कार्य में तय मापदंडों को दरकिनार कर घटिया स्तर की सामग्री—रेत, सीमेंट और ईंट—का उपयोग किया गया। यही नहीं, कंक्रीट मिश्रण के अनुपात और दीवारों की उचित क्योरिंग (तराई) में भी भारी लापरवाही बरती गई। परिणाम यह रहा कि फिनिशिंग कार्य के दौरान ही दीवारों में गहरी और लंबी दरारें उभरने लगीं।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो भवन अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुआ और पहली बारिश तक का सामना नहीं कर पाया, वह भविष्य में वहां कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और रोजाना आने वाली आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल निर्माण दोष नहीं, बल्कि एक संभावित बड़े हादसे की चेतावनी है, जिसे समय रहते गंभीरता से लेना आवश्यक है।

इस मामले में ठेकेदार की भूमिका के साथ-साथ छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के जिम्मेदार तकनीकी अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी जिन अधिकारियों—उपअभियंता और एसडीओ—को करनी थी, उनकी कथित अनुपस्थिति ने संदेह और गहरा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी या तो साइट पर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे, या फिर जानबूझकर खामियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

चौंकाने वाली बात यह है कि दीवारों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही गहरी दरारों के बावजूद न तो निर्माण कार्य रोका गया और न ही ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती दिखाई दे रही है। इससे यह आशंका और प्रबल हो जाती है कि कहीं ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के बीच मिलीभगत तो नहीं। यदि ऐसा नहीं है तो फिर इतने स्पष्ट निर्माण दोषों पर प्रशासनिक चुप्पी आखिर क्यों बनी हुई है?

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से बनने वाली परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन पचपेड़ी तहसील भवन का मामला ठीक उल्टा नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रही इस इमारत में यदि शुरुआती चरण में ही इतनी गंभीर खामियां सामने आ रही हैं, तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का भी मामला बनता है।

अब स्थानीय नागरिकों ने मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि भवन निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता, कार्य की तकनीकी स्वीकृति और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जा सके।

पचपेड़ी का यह मामला केवल एक भवन की दरारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ का गंभीर उदाहरण बन जाएगा।

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