विश्व सिकल सेल दिवस पर जागरूकता एवं जांच अभियान आयोजित

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जागरूकता, जांच और जनभागीदारी से बनेगा सिकल सेल मुक्त समाज – डॉ. मनीष बंजारा

मुंगेली/पदमपुर। विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुर में सिकल सेल जांच एवं जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “जीवन रक्षा अंतर को कम करना सिकल सेल रोग में समानता के अनुरूप लोगों को सिकल सेल रोग के प्रति जागरूक करने, समय पर जांच के लिए प्रेरित करने तथा स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संदेश दिया गया। डॉ. मनीष  बंजारा ने कहा कि “जागरूकता, जांच और जनभागीदारी से ही सिकल सेल मुक्त समाज का निर्माण संभव है।” उन्होंने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिये (अर्धचंद्राकार) के आकार की हो जाती हैं। ये विकृत कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं में फंसकर रक्त प्रवाह को बाधित करती हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी, असहनीय दर्द तथा अनेक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में आनुवंशिक रूप से संचरित होती है। यदि माता और पिता दोनों में सिकल सेल का दोषपूर्ण जीन मौजूद हो, तो संतान के इस रोग से प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं केवल एक जीन प्राप्त होने पर व्यक्ति सिकल सेल वाहक (कैरियर) कहलाता है, जो स्वयं सामान्य जीवन जी सकता है, लेकिन अगली पीढ़ी में यह जीन स्थानांतरित कर सकता है।

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कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को सिकल सेल रोग के प्रमुख लक्षणों जैसे बार-बार दर्द, अत्यधिक कमजोरी, खून की कमी (एनीमिया), हाथ-पैरों में सूजन, बार-बार संक्रमण तथा बच्चों के शारीरिक विकास में देरी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि समय पर जांच, नियमित चिकित्सकीय देखभाल और उचित उपचार से रोगी बेहतर एवं सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है।

डॉ. बंजारा ने विशेष रूप से जेनेटिक काउंसलिंग एवं विवाह पूर्व सिकल सेल जांच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि विवाह से पूर्व युवक-युवती अपनी सिकल सेल स्थिति की जांच करा लें, तो आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल की रोकथाम केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदारी का भी विषय है। जैसे परिवार के सदस्यों की स्क्रीनिंग, जेनेटिक काउंसलिंग, समय पर नवजात एवं बच्चों की जांच भी प्रभावी उपाय होते हैं।

कार्यक्रम के दौरान आए हुए 79 लोगों में से 42 लोगों की सिकल सेल जांच की गई जिनमें से 1 पॉजिटिव आया उनको आगे जांच के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया तथा उन्हें रोग की रोकथाम, उपचार एवं उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी प्रदान की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम के अंत में नागरिकों से अपील की गई कि प सिकल सेल जांच कराएं तथा अपने परिवार और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करें। इस अवसर पर यह संदेश दिया गया कि “सिकल सेल रोग किसी व्यक्ति की पहचान नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसके प्रति समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और जागरूकता आवश्यक है।”भारत सरकार ने 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है।

इस अवसर पर सीमा पहारी, पदमनी साहू,जलेश्वरी मिरि, मोनिका जांगड़े, सुधा,त्रिवेणी,अंकिता, संतोष,किशोर, उपस्थित रहे।

संदेश
“एक जांच आज, स्वस्थ पीढ़ियों का आधार कल” के प्रेरक संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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