छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति वित्तीय प्रोत्साहनों को सीधे रोजगार सृजन से जोड़ेगी: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

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2,400 करोड़ डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर; छत्तीसगढ़ के 11,400 से अधिक युवाओं को मिला पहली नौकरी का प्रोत्साहन

ईपीएफओ रायपुर ने किया प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के क्षेत्रीय राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा आज एम्स सभागार, रायपुर में एक क्षेत्रीय राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ के सफल क्रियान्वयन को रेखांकित करता है। देशव्यापी अभियान के तहत नई दिल्ली के विज्ञान भवन से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली जुड़कर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से देश भर के लाभार्थियों के खातों में लगभग 2,400 करोड़ की भारी प्रोत्साहन राशि ट्रांसफर की। नई दिल्ली में आयोजित मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम के समानांतर, रायपुर के इस आयोजन ने स्थानीय लाभार्थियों और नियोक्ताओं को सम्मानित करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया, जहां औपचारिक अर्थव्यवस्था में प्रवेश को दर्शाते हुए नव-नियुक्त युवाओं को प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति-पत्र प्रदान किए गए।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रायपुर के माननीय सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने योजना के दोहरे लाभ पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जहां एक ओर पहली बार औपचारिक क्षेत्र में नौकरी पाने वाले युवाओं को कार्यबल में शामिल होने पर महत्वपूर्ण वित्तीय प्रोत्साहन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर नियोक्ताओं को भी अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रोत्साहित व पुरस्कृत किया जा रहा है। श्री अग्रवाल ने कहा कि इस ऐतिहासिक पहल से अकेले छत्तीसगढ़ राज्य में 10,000 से अधिक नए रोजगार सृजित करने की अपार क्षमता है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि रोजगार के ये नए अवसर न केवल युवाओं के जीवन को बदल रहे हैं, बल्कि व्यवस्थित रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत और गति प्रदान करेंगे।

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओमप्रकाश चौधरी ने कार्यक्रम में बोलते हुए योजना के तहत 2,400 करोड़ के देशव्यापी रोलआउट की सराहना की। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की ‘नई औद्योगिक नीति’ वास्तव में ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ के लिए एक एकीकृत “ऐड-ऑन” के रूप में कार्य करेगी। इस राज्य-विशिष्ट ढांचे के तहत, स्थानीय उद्योगों और नियोक्ताओं को उनके द्वारा सृजित किए जाने वाले रोजगार के अवसरों की संख्या के आधार पर अतिरिक्त राज्य प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके साथ ही श्री चौधरी ने पूर्ववर्ती परिदृश्य की समीक्षा करते हुए कहा कि 2014 से पहले की शिक्षा प्रणाली वास्तविक बाजार की जरूरतों और आवश्यकताओं से काफी हद तक कटी हुई थी। उन्होंने रेखांकित किया कि 2014 के बाद कौशल प्रशिक्षण और व्यावसायिक कौशल की ओर किए गए निर्णायक बदलाव ने उद्योगों को एक अत्यंत सक्षम और रोजगार-तैयार कार्यबल उपलब्ध कराया है।

छत्तीसगढ़ के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने प्रधानमंत्री के दूरदर्शी आर्थिक दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे इस योजना ने श्रम क्षेत्र को औपचारिक रूप देने और कमजोर वर्ग के श्रमिकों को एक विश्वसनीय सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने शुरुआती स्तर पर ही इस योजना के क्रियान्वयन में शानदार सफलता और अनुपालन प्रदर्शित किया है।

रायपुर में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम देश भर में एक साथ 200 स्थानों पर चलाए जा रहे समन्वित राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा था, जिसमें राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों सहित करीब 70,000 शीर्ष स्तर के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और दूरदर्शन के माध्यम से विज्ञान भवन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण इन सभी केंद्रों पर किया गया। भारत सरकार की यह प्रमुख ‘रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन’ (ELI) योजना कुल 99,446 करोड़ के भारी-भरकम बजट के साथ दो साल की अवधि में देश भर में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा करने के बड़े लक्ष्य पर काम कर रही है।

इस योजना का ढांचागत ब्लूप्रिंट दो रणनीतिक हिस्सों में बंटा हुआ है। ‘भाग A’ के तहत, 1 लाख प्रति माह तक वेतन पाने वाले और पहली बार नौकरी में आने वाले युवाओं को एक महीने के वेतन के बराबर (अधिकतम 15,000) प्रोत्साहन राशि उनके आधार-लिंक बैंक खातों में दो किश्तों में सीधे दी जाती है। वहीं ‘भाग B’ के तहत, ईपीएफओ में पंजीकृत नियोक्ताओं को हर अतिरिक्त कर्मचारी की भर्ती पर 3,000 प्रति माह तक का इंसेंटिव 2 साल (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 4 साल) के लिए सीधे उनके पैन-लिंक्ड खातों में प्रदान किया जाता है। मार्च 2026 के संकलित राष्ट्रीय परिचालन आंकड़ों के अनुसार, देश भर में भाग-A के तहत 4.41 लाख नए कर्मचारियों को 247 करोड़ और भाग-B के तहत 17,551 संस्थानों को ₹
214 करोड़ के इंसेंटिव जारी कर राष्ट्र स्तर पर लगभग 6.46 लाख अतिरिक्त रोजगार पैदा किए जा चुके हैं, जो ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में अहम योगदान दे रहे हैं।


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