नहीं थम रहा ग्रामीण क्षेत्रों में शराब कोचियों का कारोबार
मुख्यालय से लगे गांवों में खुलेआम बिक्री, विभागीय कार्रवाई पर उठ रहे सवाल मुंगेली। जिला…
मुख्यालय से लगे गांवों में खुलेआम बिक्री, विभागीय कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
मुंगेली। जिला मुख्यालय से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांव-गांव में सक्रिय शराब कोचियों के कारण न केवल सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है, बल्कि युवाओं और परिवारों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद बड़े स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से लगे कई गांवों में शाम ढलते ही शराब कोचियों की दुकानें गुलजार होने लगती हैं। हालात यह हैं कि शराब दुकानों में कई बार स्टॉक की कमी देखने को मिलती है, जबकि दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से शराब की आसान उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन पंचायतों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, वहां किसी बड़े रसूखदार या सफेदपोश लोगों का संरक्षण होने के कारण संबंधित विभाग कठोर कार्रवाई से बचता नजर आता है। यही वजह है कि शराब कोचियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।

बीते दिनों आबकारी विभाग द्वारा जारहगांव,धरमपुरा और आसपास के क्षेत्रों में कार्रवाई की गई थी। हालांकि कार्रवाई के बाद कुछ समय तक स्थिति नियंत्रित दिखाई दी, लेकिन वर्तमान में फिर से खुलेआम शराब बिक्री शुरू हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
मुख्यालय से महज 8 से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कई गांव इस अवैध कारोबार के केंद्र बनते जा रहे हैं। इनमें मानपुर, भीमपुरी, धरमपुरा, गीधा, कोदवाबानी, नवागांव,नूनिया कछार, खुजहा और मदनपुर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन क्षेत्रों में शाम होते ही बाहरी लोगों की आवाजाही भी बढ़ने लगती है, जिससे ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना भी बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब कोचियों की पहुंच और प्रभाव इतना मजबूत है कि मदिरा प्रेमियों के लिए ये गांव पसंदीदा ठिकाने बनते जा रहे हैं। इससे सामाजिक वातावरण खराब हो रहा है और कई परिवार घरेलू तनाव, आर्थिक संकट तथा आपसी विवादों का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी याद दिलाया कि कुछ समय पहले जब महिला स्व-सहायता समूहों ने नशा मुक्ति अभियान चलाया था, तब स्थिति में काफी सुधार देखने को मिला था। महिलाएं शाम के समय समूह बनाकर गांवों में निकलती थीं और लोगों को शराब के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करती थीं। उस दौरान शराब कोचियों के हौसले कमजोर पड़ते दिखाई दिए थे।
लेकिन समय के साथ यह अभियान धीमा पड़ गया और इसका फायदा उठाकर अवैध कारोबारी फिर सक्रिय हो गए। अब ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त रूप से लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई करें, ताकि अवैध शराब बिक्री पर स्थायी रोक लगाई जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले सकती है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस बढ़ते अवैध कारोबार पर कब और कैसे निर्णायक प्रहार करता है।

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