हर दिन 8 घरों में लग रहे सोलर पैनल, अब तक 1700 परिवारों को 25.80 लाख रुपए की मुफ्त बिजली
बैंकर्स, वेंडर्स और ‘बिहान’ की दीदियों के सामूहिक प्रयास से जिला बना ‘ऊर्जा आत्मनिर्भरता’ की मिसाल
रायपुर । छत्तीसगढ़ के नवगठित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत एक बड़ी क्रांति देखने को मिल रही है। कलेक्टर के नेतृत्व में जिले में यह योजना रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ रही है। विभागीय तालमेल, बैंकर्स-वेंडर्स की सक्रियता और 'बिहान' छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की महिला सदस्यों के मैदानी प्रचार-प्रसार के चलते जिले में हर दिन औसतन 8 घरों में सोलर सेटअप इंस्टॉल किए जा रहे हैं। विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता और जिले के ऊर्जा कर्मियों के कड़े परिश्रम से चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मिले 4,312 कनेक्शनों के लक्ष्य को पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर काम जारी है। पिछले तीन महीनों अप्रैल, मई और जून में ही जिले के घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और शासकीय-निजी कार्यालयों में 550 से अधिक सोलर सेटअप लगाए जा चुके हैं, जबकि 780 नए आवेदनों पर काम तेजी से चल रहा है।
1700 हितग्राहियों ने पैदा की 25.80 लाख रुपए की बिजलीजिले में अब तक 1,700 से अधिक परिवार इस योजना से जुड़कर सीधे लाभ उठा रहे हैं। इन जागरूक उपभोक्ताओं ने अपने छतों पर लगे सोलर पैनलों से 5 लाख 88 हजार यूनिट ग्रीन एनर्जी (बिजली) का उत्पादन किया है। इससे हितग्राहियों को 25 लाख 80 हजार रुपये की सीधे मुफ्त बिजली का फायदा मिला है। इस तरह जिला अब वास्तव में “ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत” के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

सरकार दे रही है 1.08 लाख रुपए तक की भारी सब्सिडी इस योजना के तहत हितग्राहियों को केंद्र और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की ओर से संयुक्त रूप से अधिकतम 1 लाख 8 हजार रुपये तक का अनुदान (सब्सिडी) सीधे बैंक खाते में दिया जा रहा है। बिजली बिल में भारी कटौती के साथ-साथ यह योजना स्थानीय स्तर पर नवीन रोजगार के अवसर पैदा कर रही है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है।
आवेदन करना हुआ बेहद आसान, प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने बेहद पारदर्शी व्यवस्था बनाई है। उपभोक्ता घर बैठ कर आधिकारिक पोर्टल pmsuryaghar.gov.in,
’पीएम सूर्य घर ऐप’ या सीएसपीडीसीएल (CSPDCL) का ‘मोर बिजली ऐप’ या टोल-फ्री नंबर 1912,पोर्टल पर जाकर उपभोक्ता अपनी पसंद के अधिकृत वेंडर का चुनाव खुद कर सकते हैं। सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ पंचायत, ग्रामीण विकास और स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मी भी इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में जुटे हैं।

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