मुंगेली प्रशासन की बड़ी चूक? शाला प्रवेशोत्सव के आमंत्रण पत्र से स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नाम गायब
चकरभाठा में होने वाले जिला स्तरीय कार्यक्रम को लेकर बढ़ा विवाद, सरपंच व क्षेत्रीय पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी
Mungeli । जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव 2026 शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया है। प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामला उस आधिकारिक आमंत्रण पत्र को लेकर है, जिसमें कार्यक्रम स्थल Chakarbhatha चकरभाठा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल नहीं किए गए। इससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश का माहौल बन गया है।
जानकारी के अनुसार 4 जुलाई 2026, शनिवार, सुबह 11 बजे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चकरभाठा में जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन प्रस्तावित है। कार्यक्रम को प्रशासन ने हाई-प्रोफाइल स्वरूप दिया है, क्योंकि इसमें मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री Tokhan Sahu तोखन साहू तथा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपमुख्यमंत्री Arun Sao अरुण साव के शामिल होने की सूचना है। इसके अलावा क्षेत्रीय विधायकों और जिला व जनपद पंचायत अध्यक्षों के नाम भी आमंत्रण पत्र में प्रमुखता से अंकित किए गए हैं।
लेकिन सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हुआ है कि जिस ग्राम पंचायत में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, उसी पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों को आमंत्रण पत्र में स्थान नहीं दिया गया।

स्थानीय लोकतंत्र की अनदेखी?
आमंत्रण पत्र सामने आने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की उपेक्षा का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने बड़े पदों पर बैठे नेताओं को प्राथमिकता दी, जबकि जमीनी स्तर पर जनता से जुड़े प्रतिनिधियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि चकरभाठा ग्राम पंचायत के सरपंच, जिन्हें पंचायत का प्रथम नागरिक माना जाता है, उनका नाम आमंत्रण पत्र में शामिल नहीं किया गया। इसके साथ ही क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जनपद पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के नाम भी गायब हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल नाम छूटने की बात नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जमीनी प्रतिनिधियों की भूमिका को कमतर आंकने जैसा है।
जनप्रतिनिधियों ने उठाए तीखे सवाल
इस मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब गांवों में विकास कार्य, योजनाओं का क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के समाधान की बात आती है, तब प्रशासन इन्हीं स्थानीय प्रतिनिधियों पर निर्भर रहता है।
एक जनप्रतिनिधि ने नाराजगी जताते हुए कहा—
“जब योजनाओं को गांव-गांव पहुंचाने की जिम्मेदारी आती है, तब सरपंच और पंचायत सदस्य सबसे आगे रहते हैं। लेकिन जब बड़ा सरकारी कार्यक्रम होता है, तो इन्हें याद तक नहीं किया जाता। यह सीधा अपमान है।”
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि जिला प्रशासन केवल बड़े राजनीतिक चेहरों और जिला स्तरीय पदाधिकारियों को संतुष्ट करने में व्यस्त रहा, जिसके कारण जमीनी नेतृत्व की उपेक्षा हो गई।
प्रोटोकॉल पर भी उठे सवाल
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े सरकारी आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रण देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का हिस्सा माना जाता है।
विशेषकर जब कार्यक्रम किसी ग्राम पंचायत क्षेत्र में आयोजित हो रहा हो, तब वहां के सरपंच, संबंधित जनपद सदस्य और जिला पंचायत सदस्य की उपस्थिति स्वाभाविक मानी जाती है। ऐसे में उनका नाम आमंत्रण पत्र से गायब होना प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।
शिक्षा उत्सव पर विवाद की छाया
शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य बच्चों को स्कूल से जोड़ना, शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पालकों में सकारात्मक संदेश देना है। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही उत्पन्न विवाद ने आयोजन की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर आयोजित कार्यक्रम को राजनीतिक प्राथमिकताओं से ऊपर रखा जाना चाहिए था। यदि स्थानीय प्रतिनिधियों को साथ लेकर आयोजन किया जाता, तो इसका संदेश और अधिक सकारात्मक होता।
अब प्रशासन क्या करेगा?
पूरा मामला सामने आने के बाद निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस चूक को स्वीकार कर आमंत्रण सूची में संशोधन करेगा, या फिर कार्यक्रम इसी विवाद के बीच संपन्न होगा।

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