छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर आवाज़ हुई खामोश, पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोक कलाकार ने रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस, कला जगत में शोक की लहर

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की सबसे सशक्त पहचान और पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने वाली प्रख्यात लोक कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। उन्होंने 5 जुलाई की सुबह लगभग 3:15 बजे रायपुर स्थित एम्स में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उपचाराधीन थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला, संस्कृति और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फोन पर उनके परिजनों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। हालांकि, चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद रविवार तड़के उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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तीजन बाई ने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और बुलंद आवाज़ से पंडवानी जैसी लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। महाभारत की गाथाओं को उन्होंने जिस जीवंत शैली में मंच पर प्रस्तुत किया, उसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध किया। तंबूरा हाथ में लेकर उनकी प्रस्तुति भारतीय लोक संस्कृति की एक विशिष्ट पहचान बन गई थी।

उन्होंने अपने लंबे कलात्मक जीवन में भारत के साथ-साथ अनेक देशों में हजारों प्रस्तुतियां दीं। अपनी कला के माध्यम से उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया और लोककला को नई प्रतिष्ठा दिलाई। उनकी उपलब्धियों के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। इसके अलावा उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान भी प्राप्त हुए।

तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण की मिसाल रहा। सीमित संसाधनों से शुरुआत कर उन्होंने अपनी प्रतिभा और अथक परिश्रम के बल पर विश्वभर में अपनी अलग पहचान बनाई। वे नई पीढ़ी के लोक कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत थीं और उन्होंने अनेक युवा कलाकारों को पंडवानी की परंपरा से जोड़ा।

उनके निधन को भारतीय लोककला जगत की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। कला प्रेमियों का कहना है कि तीजन बाई जैसी विभूतियां विरले ही जन्म लेती हैं। उनकी आवाज़, उनकी प्रस्तुति और लोक संस्कृति के प्रति उनका समर्पण सदैव अमर रहेगा।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली इस महान लोक कलाकार को पूरा देश नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। उनकी स्मृतियां और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी। ॐ शांति।

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