जैविक ईंधनों पर निर्भरता घटाने की दिशा में बालोद की अभिनव पहल

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कलेक्ट्रेट परिसर में शुरू हुई सार्वजनिक ई-व्हीकल चार्जिंग सुविधा, हरित परिवहन को मिलेगा बढ़ावा

7.2 किलोवाट क्षमता का चार्जर हुआ स्थापित, मात्र 15 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलेगी चार्जिंग सुविधा

जिले के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर 60 किलोवाट के फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की तैयारी

NTPC World Environment Day

रायपुर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हरित विकास और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन के विजन को साकार करने की दिशा में बालोद जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया है। यह पहल जैविक ईंधनों पर निर्भरता कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा जिले में ई-वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

जिला प्रशासन द्वारा शासकीय कार्यों में वाहनों की पूलिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त 7.2 किलोवाट क्षमता का सार्वजनिक ईवी चार्जर स्थापित किया गया है। जिला खनिज संस्थान न्यास के सहायक नोडल अधिकारी ने बताया कि इस चार्जिंग स्टेशन का उपयोग वाहन स्वामी 'टाटा पावर ईज़ेड चार्ज' मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकेंगे। चार्जिंग की दर मात्र 15 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है, जिससे ई-वाहन चालकों को किफायती एवं सुविधाजनक चार्जिंग सुविधा उपलब्ध होगी।

हरित ऊर्जा आधारित अधोसंरचना का होगा विस्तार
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित यह चार्जिंग स्टेशन जिले में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था विकसित करने की शुरुआत है। आगामी चरण में जिले के प्रमुख सार्वजनिक एवं व्यावसायिक स्थलों पर 60 किलोवाट क्षमता वाले फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे ई-वाहनों की आवाजाही और अधिक सुगम होगी तथा जिले में चार्जिंग अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण के साथ ईंधन व्यय में भी होगी बचत
जिला प्रशासन का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने से पेट्रोल एवं डीजल जैसे जैविक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, वायु प्रदूषण में कमी आएगी तथा आम नागरिकों के ईंधन व्यय में भी उल्लेखनीय बचत होगी। यह पहल स्वच्छ, हरित और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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