शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: मुंगेली के ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, एक शिक्षक के भरोसे चल रही पढ़ाई

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आरटीई के मानकों की अनदेखी, मूलभूत सुविधाओं के अभाव में प्रभावित हो रही बच्चों की शिक्षा

मुंगेली । जिले के ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में संचालित शासकीय प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निर्धारित शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात का पालन नहीं होने से कई विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अनेक स्कूल ऐसे हैं जहां 30 से अधिक छात्र होने के बावजूद केवल एक शिक्षक पदस्थ है, जिसे शिक्षण कार्य के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं।

शिक्षा विभाग के नियमानुसार प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक, 60 विद्यार्थियों पर दो, 90 पर तीन, 120 पर चार तथा 150 से 200 विद्यार्थियों पर पांच शिक्षकों की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके बावजूद जिले के कई विद्यालयों में इन मानकों का पालन नहीं हो रहा है। परिणामस्वरूप एक शिक्षक को कई कक्षाओं का संचालन एक साथ करना पड़ रहा है।

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अन्य सरकारी कार्यों से बढ़ रही परेशानी

ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों का कहना है कि नियमित शिक्षण कार्य के अलावा उन्हें बीएलओ ड्यूटी, पल्स पोलियो अभियान, जनगणना, विभिन्न सर्वेक्षण तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी लगाया जाता है। ऐसे समय में कई विद्यालयों में पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं रह जाता, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

मानपुर (चुचरूंगपुर) स्कूल की स्थिति चिंताजनक

मुंगेली जिले के संकुल तरवरपुर अंतर्गत संचालित शासकीय प्राथमिक शाला मानपुर (चुचरूंगपुर) इसका एक उदाहरण है। सत्र 2026-27 में विद्यालय में 30 से अधिक विद्यार्थी दर्ज हैं, लेकिन यहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरा विद्यालय संचालित हो रहा है।

विद्यालय में पदस्थ प्रधानपाठक देवी लाल साहू का 30 मार्च 2026 को स्थानांतरण होने के बाद शेष एक शिक्षक को अध्यापन के साथ-साथ मध्यान्ह भोजन, रजिस्टर संधारण एवं अन्य प्रशासनिक कार्य भी संभालने पड़ रहे हैं।

मूलभूत सुविधाओं का अभाव

विद्यालय में शिक्षकों की कमी के साथ-साथ शौचालय, बाउंड्रीवाल, किचन शेड और बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बताया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

नए सत्र के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था

16 जून से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के बावजूद कई ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। कहीं प्रधानपाठक का पद रिक्त है तो कहीं शिक्षकों की कमी बनी हुई है। कई विद्यालय भवन, खेल सामग्री, फर्नीचर और अन्य आवश्यक संसाधनों से भी वंचित हैं।

निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्याग्रस्त विद्यालयों का नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा है। जिन स्कूलों में शिक्षक और मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वहां समस्याओं के समाधान के लिए अपेक्षित पहल दिखाई नहीं देती। वहीं कई विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी विमित्रा धृतलहरे ने बताया कि मानपुर क्षेत्र के विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं एवं अधोसंरचना से संबंधित आवश्यक जानकारी तैयार कर जिला स्तर पर भेज दी गई है। विद्यालय की आवश्यकताओं के निराकरण के लिए उच्च कार्यालय को प्रस्ताव भी प्रेषित किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि विद्यालय में एकल शिक्षकीय व्यवस्था एवं शिक्षकों की कमी के संबंध में रिक्त पदों की पूरी जानकारी शासन को भेजी जा चुकी है। शासन स्तर से जैसे ही पदस्थापना के आदेश जारी होंगे, उसके अनुसार विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाएगी।

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