भक्ति और उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा
जयघोष, भजन-कीर्तन और पुष्पवर्षा से गुंजायमान हुआ नगर, मौसी मां मंदिर पहुंचे भगवान
श्रद्धालुओं ने नारियल, चना और गुड़ का लगाया भोग, 10 दिन बाद देवशयनी एकादशी पर होगी बहुड़ा यात्रा
मुंगेली। आषाढ़ मास के पावन रथयात्रा महापर्व पर गुरुवार को नगर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ निकाली गई। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देवांगन मोहल्ला स्थित राधाकृष्ण मंदिर में उमड़ने लगी। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और मंगल आरती के बीच भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा का विशेष श्रृंगार कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद तीनों विग्रहों को सुसज्जित रथ पर विराजमान कराया गया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रथयात्रा का शुभारंभ हुआ।

रथयात्रा में नगर के विभिन्न मोहल्लों, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भगवान जगन्नाथ के जयकारों, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनि से पूरा नगर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ रथ को खींचते हुए भगवान के दर्शन का पुण्य लाभ लेते रहे।
नगर भ्रमण के दौरान जगह-जगह हुआ स्वागत
भव्य रथयात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली। यात्रा के दौरान अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी, पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा प्रसाद का वितरण किया। घरों की छतों और सड़क किनारे बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए खड़े दिखाई दिए। महिलाओं ने मंगल गीत गाए तो बच्चों और युवाओं ने भी उत्साह के साथ रथयात्रा में भागीदारी निभाई।
पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति और खुशहाली की कामना की। कई स्थानों पर भक्तों ने श्रद्धापूर्वक नारियल अर्पित किए और भगवान के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मौसी मां मंदिर पहुंचे भगवान जगन्नाथ
नगर भ्रमण के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा का रथ मौसी मां के मंदिर पहुंचा, जहां विशेष पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता के अनुसार रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर विश्राम करने जाते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए भगवान को मौसी मां मंदिर में विराजमान कराया गया।
मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने भगवान का भव्य स्वागत किया तथा नारियल, चना और गुड़ का भोग अर्पित किया। दिनभर मंदिर परिसर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
10 दिन बाद होगी भगवान की वापसी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ मौसी मां मंदिर में दस दिनों तक विश्राम करेंगे। इसके बाद देवशयनी एकादशी के अवसर पर भगवान की बहुड़ा (वापसी) यात्रा निकाली जाएगी और पुनः उन्हें मूल मंदिर में विराजमान कराया जाएगा।
देवशयनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इसी दिन से भगवान विष्णु चार माह के योगनिद्रा काल में प्रवेश करते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश एवं अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।
जैन समाज में भी प्रारंभ होगा चातुर्मास
देवशयनी एकादशी के अगले दिन से जैन धर्मावलंबियों का चातुर्मास भी प्रारंभ होगा। इस अवधि में जैन संत एवं आचार्य एक ही स्थान पर निवास कर साधना, प्रवचन, स्वाध्याय और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। श्रद्धालु इस दौरान धर्म, तप और सेवा के विविध कार्यक्रमों में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।
आस्था और संस्कृति का प्रतीक है रथयात्रा
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और जनआस्था का प्रतीक मानी जाती है। इस पर्व में समाज के सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होकर भगवान के रथ को खींचते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष इस महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और उल्लास देखने को मिलता है। इस वर्ष भी मुंगेली में रथयात्रा पूरे धार्मिक उत्साह, अनुशासन और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुई।

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