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समय-सीमा खत्म, सड़क अधूरी… ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग तेज, नगर पालिका ने जारी किया नोटिस; गुणवत्ता और निगरानी पर भी उठे गंभीर सवाल

मुंगेली। नगर पालिका परिषद मुंगेली की लगभग 5.06 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी गौरव पथ उन्नयन एवं सौंदर्यीकरण परियोजना अब विकास से अधिक विवादों के कारण चर्चा में है। निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा है। बरसात के बीच उखड़ी सड़क, खुले निर्माण स्थल, कीचड़, जलभराव और जाम जैसी समस्याओं से आम नागरिक परेशान हैं। इसी बीच वार्ड पार्षद विजयलक्ष्मी अवधेश शुक्ला की लिखित शिकायत के बाद नगर पालिका प्रशासन ने संबंधित निर्माण एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही भुगतान में कटौती और नियमानुसार कार्रवाई की बात भी कही गई है।

परियोजना को लेकर अब केवल निर्माण में देरी ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी, अनुबंध पालन, तकनीकी गुणवत्ता और जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक दलों से लेकर जनप्रतिनिधि तक इस मामले में खुलकर सामने आ गए हैं।


समय-सीमा समाप्त, लेकिन गौरव पथ अब भी अधूरा

नगर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्ग पर बनने वाले गौरव पथ को शहर की पहचान के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत सड़क चौड़ीकरण, डिवाइडर, फुटपाथ, सौंदर्यीकरण, लाइटिंग, स्कल्पचर और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जानी थीं।

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लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका। बरसात शुरू होते ही अधूरी सड़क शहरवासियों के लिए परेशानी का कारण बन गई। कई स्थानों पर सड़क उखड़ी हुई है, खुदाई खुली पड़ी है तथा जलभराव और कीचड़ के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है।


पार्षद ने सीएमओ को सौंपा शिकायत पत्र

वार्ड पार्षद विजयलक्ष्मी अवधेश शुक्ला ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि निर्माण एजेंसी ने अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया है।

शिकायत में कहा गया कि—

  • कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं किया गया।
  • निर्माण की गति लगातार धीमी रही।
  • नागरिकों को भारी असुविधा हुई।
  • ठेकेदार की कार्यप्रणाली अनुबंध के अनुरूप नहीं रही।

उन्होंने मांग की कि यदि नोटिस के बाद संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो अनुबंध निरस्त कर संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाए।


आयुष शुक्ला बोले— ठेकेदार की मनमानी अब नहीं चलेगी

पार्षद प्रतिनिधि आयुष शुक्ला ने कहा कि गौरव पथ निर्माण को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं।

उनके अनुसार कई बार ठेकेदार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन केवल सुपरवाइजर से ही मुलाकात हो सकी। ठेकेदार ने कभी जनप्रतिनिधियों से संवाद स्थापित करने का प्रयास नहीं किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर की अवधि समाप्त होने के एक माह बाद भी निर्माण में कोई उल्लेखनीय प्रगति दिखाई नहीं दी।

उन्होंने मांग की—

  • टेंडर तत्काल निरस्त किया जाए।
  • किसी सक्षम एजेंसी को कार्य दिया जाए।
  • संबंधित फर्म का भुगतान रोका जाए।
  • दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

सीएमओ ने माना— समय-सीमा समाप्त, नोटिस जारी

मुख्य नगर पालिका अधिकारी होरी सिंह ठाकुर ने पुष्टि की कि निर्माण कार्य की निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी है।

उन्होंने बताया—

  • संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
  • अनुबंध के अनुसार भुगतान में कटौती की जाएगी।
  • सड़क की तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं।
  • मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई होगी।

सीएमओ ने यह भी स्वीकार किया कि कार्य में देरी का एक कारण शासन स्तर पर डामर की उपलब्धता प्रभावित होना रहा, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही भी सामने आई है। उनके अनुसार पार्षद द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं।


तकनीकी दस्तावेजों से खुली परियोजना की पूरी तस्वीर

परियोजना से जुड़े तकनीकी दस्तावेजों के अनुसार कुल स्वीकृत लागत लगभग 506.50 लाख रुपये (5.06 करोड़) है।

दस्तावेजों में जिन कार्यों का उल्लेख है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • बीटी रोड रिन्यूअल
  • डिवाइडर निर्माण
  • स्टॉर्म वाटर ड्रेन
  • फुटपाथ
  • डिजाइनर एलिमेंट्स
  • लैंडस्केपिंग
  • स्कल्पचर
  • विद्युत कार्य
  • प्लंबिंग
  • पेंटिंग
  • अन्य सिविल कार्य

दस्तावेजों में तकनीकी अधिकारियों, नगर पालिका अधिकारियों तथा आर्किटेक्ट के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि परियोजना विधिवत तकनीकी स्वीकृति के बाद प्रारंभ की गई थी।


खोजी पड़ताल: केवल ठेकेदार ही जिम्मेदार या निगरानी व्यवस्था भी?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल केवल निर्माण एजेंसी पर नहीं, बल्कि नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहा है।

यदि कार्य लगातार निर्धारित समय से पीछे चल रहा था तो—

  • प्रगति की नियमित समीक्षा क्यों नहीं हुई?
  • विलंब के दौरान समय रहते दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
  • नागरिकों की शिकायतों पर तत्काल निर्णय क्यों नहीं लिया गया?
  • बरसात शुरू होने से पहले सड़क को सुरक्षित बनाने के उपाय क्यों नहीं किए गए?

हालांकि इन सवालों के अंतिम उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। अभी तक किसी भी स्तर पर अनियमितता सिद्ध नहीं हुई है।


कांग्रेस ने उठाई गुणवत्ता जांच की मांग

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने आरोप लगाया कि लगभग पांच करोड़ रुपये की यह परियोजना शुरू से विवादों में रही है।

उन्होंने कहा कि—

  • निर्माण में भारी लापरवाही हुई।
  • आम नागरिक धूल, कीचड़ और जाम से परेशान हैं।
  • केवल नोटिस पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने मांग की कि निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी गुणवत्ता जांच कराई जाए। यदि गुणवत्ता में कमी या अनियमितता मिले तो संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण नहीं होने पर कांग्रेस आंदोलन करेगी।


वार्ड पार्षद सूरज यादव ने भी उठाए गंभीर सवाल

वार्ड पार्षद सूरज यादव ने कहा कि गौरव पथ की स्थिति बेहद खराब है।

उनके अनुसार—

  • निर्माण लगभग बंद पड़ा है।
  • बरसात में नालियों का पानी दुकानों तक पहुंच रहा है।
  • व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि ठेकेदार लगातार मनमानी कर रहा है तो उसे किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा होगा। उन्होंने भी तत्काल ब्लैकलिस्ट करने और निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की।


ठेकेदार का पक्ष: केवल डामरीकरण बाकी, डामर की कमी बनी वजह

निर्माण एजेंसी के ठेकेदार अशोक तिवारी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परियोजना में केवल डामरीकरण (बीटी लेयर) का कार्य शेष है।

उनके अनुसार—

  • लाइटिंग का कार्य पूरा हो चुका है।
  • फुटपाथ तैयार हैं।
  • स्कल्पचर सहित अधिकांश निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में डामर की उपलब्धता प्रभावित रही, जिसके कारण कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। साथ ही निर्माण सामग्री की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और परियोजना में रेट एस्केलेशन का लाभ नहीं मिल रहा।

उनका दावा है कि यदि शासन अक्टूबर तक रेट एस्केलेशन की अनुमति देता है तो 15–20 दिनों में डामरीकरण पूरा कर दिसंबर तक परियोजना जनता को समर्पित कर दी जाएगी।


शहरवासियों की सबसे बड़ी चिंता— कब मिलेगी राहत?

गौरव पथ शहर की मुख्य यातायात धुरी है। रोजाना हजारों लोग इसी मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में निर्माण में देरी का सीधा असर व्यापार, यातायात और आम नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होता है, लेकिन यदि समय पर कार्य पूरा नहीं हो तो वही परियोजना लोगों की परेशानी का कारण बन जाती है।


अब आगे क्या?

नगर पालिका द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सभी की नजरें आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

मुख्य प्रश्न हैं—

  • क्या ठेकेदार का जवाब संतोषजनक होगा?
  • क्या भुगतान में वास्तव में कटौती होगी?
  • क्या गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?
  • क्या अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई होगी?
  • और सबसे महत्वपूर्ण— मुंगेली का बहुप्रतीक्षित गौरव पथ आखिर जनता को कब मिलेगा?

फिलहाल यह मामला केवल अधूरे निर्माण का नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की समयबद्धता, गुणवत्ता, प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग का भी बन गया है। जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि देरी के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है और परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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