कालूपुर रेलवे स्टेशन पर बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति से रूबरू हुए छत्तीसगढ़ के पत्रकार

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मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना तेजी से अंतिम चरण की ओर; 357 किमी वायाडक्ट, 452 किमी पियर और 17 नदी पुलों का निर्माण पूरा

एनएचएसआरसीएल के उप मुख्य परियोजना प्रबंधक मनोज गुप्ता ने गुजरात अध्ययन दौरे पर आए पत्रकारों को दी परियोजना की विस्तृत जानकारी

अहमदाबाद । गुजरात के अध्ययन दौरे पर आए छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने सोमवार को अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन का दौरा कर देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना के निर्माण कार्य का अवलोकन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के उप मुख्य परियोजना प्रबंधक मनोज गुप्ता ने पत्रकारों को परियोजना की प्रगति, निर्माण तकनीक, अत्याधुनिक इंजीनियरिंग, सुरक्षा मानकों तथा भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी।

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उन्होंने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि भारत के परिवहन क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का आधार है। यह परियोजना देश को विश्वस्तरीय हाई स्पीड रेल नेटवर्क की दिशा में आगे ले जाने के साथ-साथ आधुनिक इंजीनियरिंग, आधारभूत संरचना और आर्थिक विकास का नया अध्याय भी लिखेगी।

मनोज गुप्ता ने बताया कि 508 किलोमीटर लंबी मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। 13 जुलाई 2026 तक परियोजना के अंतर्गत 357 किलोमीटर वायाडक्ट (एलिवेटेड कॉरिडोर) तथा 452 किलोमीटर पियर (स्तंभ) का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इससे परियोजना के अधिकांश प्रमुख सिविल कार्य निर्णायक चरण में पहुंच गए हैं।

उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत अब तक 17 नदी पुल, 5 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) पुल तथा 14 स्टील पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। इन पुलों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक तकनीकों से किया गया है ताकि हाई स्पीड ट्रेनों का सुरक्षित एवं निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए परियोजना में बड़े पैमाने पर कार्य किया जा रहा है। लगभग 297 किलोमीटर लंबे मार्ग पर छह लाख से अधिक नॉइज बैरियर लगाए जा चुके हैं। इन बैरियरों से ट्रेन संचालन के दौरान आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में ध्वनि का प्रभाव काफी कम होगा।

ट्रैक निर्माण की प्रगति पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 212 किलोमीटर आरसी ट्रैक बेड का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा लगभग 200 किलोमीटर ट्रैक स्लैब तैयार किए जा चुके हैं, जबकि 88 किलोमीटर ट्रैक स्लैब बिछाकर उसमें सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार (सीएएम) इंजेक्ट किया जा चुका है। यह प्रक्रिया हाई स्पीड रेल ट्रैक की मजबूती, स्थिरता और लंबी आयु सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

परियोजना में विद्युत व्यवस्था का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 8,900 से अधिक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई) मस्त स्थापित किए जा चुके हैं, जो लगभग 199 किलोमीटर मुख्य वायाडक्ट को कवर करते हैं। इन्हीं के माध्यम से भविष्य में हाई स्पीड ट्रेनों को विद्युत आपूर्ति की जाएगी।

मनोज गुप्ता ने बताया कि गुजरात के वलसाड जिले में स्थित एकमात्र पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं महाराष्ट्र के पालघर जिले में बनने वाली सात पर्वतीय सुरंगों में से तीन सुरंगों का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया है।

मुंबई महानगर क्षेत्र में बनने वाली 21 किलोमीटर लंबी सुरंग परियोजना की सबसे जटिल इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल है। उन्होंने बताया कि बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) से शिलफाटा के बीच प्रस्तावित इस सुरंग में अब तक 5 किलोमीटर NATM (न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड) तकनीक से खुदाई पूरी हो चुकी है। शेष 16 किलोमीटर सुरंग का निर्माण अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के माध्यम से किया जाएगा। विक्रोली शाफ्ट से पहली टीबीएम द्वारा खुदाई का कार्य शुरू हो चुका है।

उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत तीन प्रमुख रोलिंग स्टॉक डिपो विकसित किए जा रहे हैं। इनमें गुजरात के साबरमती और सूरत तथा महाराष्ट्र के ठाणे स्थित डिपो शामिल हैं। इन डिपो में बुलेट ट्रेनों का रखरखाव, निरीक्षण और तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। तीनों स्थानों पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है।

स्टेशनों की प्रगति पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि परियोजना के सभी 12 बुलेट ट्रेन स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। गुजरात के सभी आठ स्टेशनों पर अब फिनिशिंग कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन स्टेशनों को विश्वस्तरीय यात्री सुविधाओं, डिजिटल सूचना प्रणाली, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, एस्केलेटर, लिफ्ट तथा दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि परियोजना में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन हाई स्पीड रेल प्रणाली के अनुभवों के आधार पर सिग्नलिंग, संचार, ट्रैक, विद्युत प्रणाली और संचालन व्यवस्था विकसित की जा रही है। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में ट्रेन को स्वतः रोकने वाली उन्नत सुरक्षा प्रणाली भी इसमें शामिल की गई है।

पत्रकारों ने निर्माण गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण, भूमि अधिग्रहण, स्थानीय रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण तथा भविष्य में संचालन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। मनोज गुप्ता ने बताया कि परियोजना के माध्यम से बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों को हाई स्पीड रेल तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में भारत इस क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।

उन्होंने कहा कि परियोजना केवल दो महानगरों को जोड़ने तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से गुजरात और महाराष्ट्र के औद्योगिक, व्यावसायिक तथा शहरी क्षेत्रों को नई आर्थिक गति मिलेगी। तेज परिवहन व्यवस्था से उद्योग, व्यापार, निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे तथा परियोजना के आसपास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा।

अध्ययन दौरे के दौरान पत्रकारों ने कालूपुर रेलवे स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया तथा परियोजना में अपनाई जा रही आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा मानकों की जानकारी प्राप्त की।

मनोज गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना देश की आधारभूत संरचना के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगी और इसके पूरा होने के बाद भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा, जहाँ अत्याधुनिक हाई स्पीड रेल नेटवर्क संचालित होता है।

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