बैटरी चालित ट्रायसाइकिल से सोमारू के जीवन में आया स्वावलंबन और सम्मान का नया सवेरा
रायपुर । बैटरी चालित ट्राइसाइकिल ने सोमारू जैसे दिव्यांगजनों के जीवन में एक नई क्रांति ला दी है। बिना किसी पर निर्भर हुए, वे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं। इस सुविधा से उनके दैनिक कार्य आसान हो गए हैं, जिससे उन्हें न केवल आवागमन में सहूलियत मिली है, बल्कि उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर स्वावलंबी बन रहे हैं।
जीवन में स्वावलंबन और सम्मान का एक नया सवेरा लाया बैटरी चालित ट्रायसाइकिल छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। नारायणपुर जिले के ग्राम गुडरीपारा के निवासी 47 वर्षीय श्री सोमारू नेताम का जीवन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। समाज कल्याण विभाग की पहल से मिली बैटरी चलित ट्रायसाइकिल ने न केवल उनकी शारीरिक सीमाओं को पीछे छोड़ दिया, बल्कि उनके जीवन में स्वावलंबन और सम्मान का एक नया सवेरा भी लाया है।
संघर्ष की राह से आत्मनिर्भरता का सफर श्री सोमारू नेताम 75 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांगता के साथ जीवन यापन कर रहे थे। एक समय था जब दैनिक कामकाज, बाजार जाना, अस्पताल पहुंचना या किसी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उन्हें पूरी तरह परिजनों और पड़ोसियों पर निर्भर रहना पड़ता था। दूसरों पर यह निर्भरता उनके आत्मविश्वास को धीरे-धीरे कम कर रही थी और कई बार जरूरी काम भी समय पर पूरे नहीं हो पाते थे। उनकी इस स्थिति में बदलाव तब आया, जब छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग की 'मोटराइज्ड ट्रायसाइकिल (बैटरी चलित) प्रदाय योजना' के तहत उन्हें बैटरी चलित ट्रायसाइकिल प्रदान की गई। यह छोटी सी सुविधा उनके जीवन का सबसे बड़ा संबल बन गई।

*घर की चौखट से बाजार और बैंक तकआवागमन हुआ आसान * ट्रायसाइकिल मिलने के बाद सोमारू नेताम का जीवन पूरी तरह बदल गया। अब वे बिना किसी की मदद के बैंक, बाजार, अस्पताल और अन्य स्थानों पर स्वयं आ-जा रहे हैं। आवागमन आसान होने से उनके सभी कार्य बिना किसी देरी के समय पर पूरे हो रहे हैं। इसी तरह सामाजिक गतिविधियों और पारिवारिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उनकी आत्मनिर्भरता से परिवार के सदस्यों को भी बड़ी मानसिक और व्यावहारिक राहत मिली है। श्री सोमारू नेताम ने कहा कि यह बैटरी चलित ट्रायसाइकिल मेरे लिए सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि मेरी आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की नई शुरुआत है। अब मुझे अपने काम के लिए किसी का मुंह नहीं ताकना पडता है। सोमारू नेताम ने इस अमूल्य सहयोग के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं समाज कल्याण विभाग का हृदय से आभार व्यक्त किया है। सोमारू नेताम की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब सरकार की जनकल्याणकारी नीतियां सही और पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचती हैं, तो वे समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग को भी मुख्यधारा से जोड़ देती हैं। उचित सहयोग और अवसर मिले, तो दिव्यांगजन भी पूरे सम्मान और स्वाभिमान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं।

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.

