स्टॉप डायरिया अभियान: ग्राम पदमपुर में ‘आरोग्य संवाद’ के जरिए लोगों को किया गया जागरूक

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ओआरएस, जिंक, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के महत्व पर दी गई जानकारी, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की सुरक्षा पर रहा विशेष फोकस

पदमपुर। डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव और ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुर द्वारा स्टॉप डायरिया अभियान के अंतर्गत ग्राम पदमपुर में “आरोग्य संवाद – दस्त निवारण का समागम” आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को डायरिया की रोकथाम, सुरक्षित पेयजल, व्यक्तिगत स्वच्छता और समय पर उपचार के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

अभियान के दौरान विशेष रूप से 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं उनके अभिभावकों को डायरिया से बचाव के उपायों से अवगत कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर उपचार से डायरिया के कारण होने वाली अधिकांश गंभीर समस्याओं और बाल मृत्यु को रोका जा सकता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनीष कुमार बंजारा ने कहा कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में डायरिया मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। उन्होंने बताया कि दस्त शुरू होते ही बच्चे को ओआरएस का घोल देना चाहिए तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार 14 दिनों तक जिंक की गोली देना आवश्यक है। इससे बच्चे के शरीर में पानी की कमी नहीं होती और बीमारी से जल्दी उबरने में मदद मिलती है।

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उन्होंने कहा कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध पिलाना चाहिए, क्योंकि यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ डायरिया से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। छह माह के बाद बच्चों को स्वच्छ एवं ताजा पूरक आहार, उबला या सुरक्षित पेयजल तथा संतुलित पोषण दिया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य टीम ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों को ओआरएस घोल तैयार करने और सही तरीके से पिलाने की विधि का प्रदर्शन कर समझाया। साथ ही शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) के लक्षणों की पहचान करने तथा गंभीर स्थिति में तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम में ग्रामीणों को हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने, भोजन को हमेशा ढंककर रखने, खुले में शौच नहीं करने, घर एवं आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने तथा केवल सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने का संदेश भी दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की कि यदि गांव में किसी भी बच्चे को बार-बार पतले दस्त या डायरिया की शिकायत हो तो तत्काल मितानिन अथवा स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें, ताकि समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके और किसी भी बच्चे की जान को खतरे से बचाया जा सके।

कार्यक्रम में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक श्रीमती ललिता साहू, मितानिन श्रीमती सविता साहू तथा ग्राम की सक्रिय महिलाओं ने भाग लिया। सभी ने मिलकर डायरिया मुक्त, स्वच्छ एवं स्वस्थ ग्राम बनाने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि स्टॉप डायरिया अभियान के माध्यम से लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में डायरिया की रोकथाम और जनस्वास्थ्य को मजबूत बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।

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