‘खुदाई में मिला सोना’ बताकर पीतल का हार बेचने वाले अंतर्राज्यीय ठग गिरोह का पर्दाफाश, 22.50 लाख की ठगी का खुलासा
मुंबई से मुख्य आरोपी समेत तीन गिरफ्तार, दिल्ली के करोल बाग से लाते थे पीतल के आभूषण, कई राज्यों में करोड़ों की ठगी की आशंका
रायपुर। रायपुर पुलिस ने खुदाई में मिला पुराना सोना बताकर लोगों को लाखों रुपये की चपत लगाने वाले एक अंतर्राज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा थाना न्यू राजेंद्र नगर, तेलीबांधा और डीडी नगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के मुख्य आरोपी शंभू राय सहित दो महिला आरोपियों को महाराष्ट्र के मुंबई से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 लाख रुपये नकद, 12 चांदी के सिक्के, पीतल के आभूषण, चार मोबाइल फोन तथा चार फर्जी आधार कार्ड जब्त किए हैं। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने रायपुर के तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में लोगों को 22.50 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया। वहीं पूछताछ में आरोपियों ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में एक दर्जन से अधिक वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने देशभर में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है।
तीन थानों के मामलों का एक साथ खुलासा
पहला मामला थाना न्यू राजेंद्र नगर का है, जहां प्रार्थी महेश कानस्कर को आरोपियों ने खुद को दिहाड़ी मजदूर बताते हुए पुराने सिक्के और खुदाई में मिला सोने का हार दिखाया। आरोपी ने बहन की शादी का हवाला देकर हार बेचने की बात कही। विश्वास जीतने के लिए हार से असली सोने का छोटा टुकड़ा जांच के लिए दिया गया, जो शुद्ध सोना निकला। इसके बाद प्रार्थी ने 2.50 लाख रुपये देकर पूरा हार खरीद लिया। बाद में जांच में पूरा हार नकली और तांबे का निकला।

दूसरा मामला थाना तेलीबांधा क्षेत्र का है। यहां यश मोटवानी को आरोपियों ने पुराने सिक्के दिखाकर संपर्क किया और खुदाई में मिला सोने का हार बेचने का झांसा दिया। जांच के लिए दिए गए टुकड़े के असली निकलने पर पीड़ित ने 10 लाख रुपये में हार खरीद लिया। बाद में पूरा हार पीतल का निकला।
तीसरी घटना थाना डीडी नगर क्षेत्र की है, जहां धवल बडोदरिया को लगभग दो किलो वजनी सोने का हार दिखाकर 10 लाख रुपये में बेचा गया। जांच कराने पर वह भी नकली निकला।
तीनों मामलों में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।
एक जैसा तरीका, ऐसे फंसाते थे शिकार
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि तीनों घटनाओं में आरोपियों का तरीका बिल्कुल एक जैसा था। आरोपी पहले आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को तलाशते थे। फिर स्वयं को दिहाड़ी मजदूर या खुदाई का काम करने वाला व्यक्ति बताकर संपर्क करते थे और दावा करते थे कि खुदाई के दौरान उन्हें पुराने समय का सोना और सिक्के मिले हैं।
विश्वास दिलाने के लिए वे सोने जैसा दिखने वाला भारी हार दिखाते थे। यदि खरीदार जांच कराने की बात करता, तो पहले से तैयार असली सोने का छोटा टुकड़ा तोड़कर दे देते थे। जांच में वह टुकड़ा असली निकलने पर पीड़ित पूरी तरह उनके झांसे में आ जाता था। इसके बाद आरोपी बहन या बेटी की शादी अथवा आर्थिक मजबूरी का हवाला देकर भारी भरकम हार कम कीमत में बेचने का लालच देते थे। रुपये मिलने के बाद पीड़ित को पीतल का हार थमा दिया जाता और आरोपी मोबाइल बंद कर फरार हो जाते थे।
तकनीकी जांच से मुंबई तक पहुंची पुलिस
पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रॉबिन्सन गुरिया तथा पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में गठित संयुक्त टीम ने तीनों मामलों का सूक्ष्म विश्लेषण किया। सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया। जांच में आरोपियों की लोकेशन महाराष्ट्र के मुंबई में मिली।
इसके बाद पुलिस टीम मुंबई पहुंची और लगातार निगरानी के बाद मुख्य आरोपी शंभू राय, गीता गुजराती तथा शांति गुजराती को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में शंभू राय ने बताया कि गीता गुजराती उसकी रिश्ते की चाची है, जबकि शांति गुजराती उसके मोहल्ले की परिचित है। दोनों महिलाओं को वह अलग-अलग मामलों में अपनी मां या रिश्तेदार बताकर पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए साथ ले जाता था।
दिल्ली के करोल बाग से लाते थे नकली आभूषण
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह पीतल के आभूषण दिल्ली के करोल बाग से खरीदकर लाता था और उन्हें पुराने सोने के आभूषण बताकर बेचता था। पुलिस ने आरोपी शंभू राय के कब्जे से चार अलग-अलग फर्जी आधार कार्ड भी बरामद किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
देशभर में फैला है गिरोह का नेटवर्क
पूछताछ में आरोपियों ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में एक दर्जन से अधिक वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। रायपुर पुलिस अब अन्य राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित कर गिरोह के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी जुटा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है।
गिरफ्तार आरोपी
- शंभू राय (36 वर्ष), निवासी केनाल पटरी, केशव नगर, रेलवे फाटक, थाना गोविंदपुर, जिला कानपुर नगर (उत्तर प्रदेश)।
- गीता गुजराती, निवासी केशव नगर, थाना गोविंदपुर, जिला कानपुर नगर (उत्तर प्रदेश)।
- शांति गुजराती (35 वर्ष), निवासी केशव नगर, थाना गोविंदपुर, जिला कानपुर नगर (उत्तर प्रदेश)।
रायपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुदाई में मिला सोना, पुराने सिक्के या आभूषण सस्ते दाम में बेचने का लालच दे, तो उसके झांसे में न आएं। ऐसे मामलों की तत्काल पुलिस को सूचना दें, ताकि इस प्रकार की संगठित ठगी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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