योजनाओं का संबल, आत्मनिर्भरता की ओर कदम
स्पॉन संवर्धन योजना से हरिश्चंद्र जांगड़े ने गढ़ी सफलता की नई इबारत
रायपुर । मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित स्पॉन संवर्धन योजना आदिवासी और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन के लिए निःशुल्क मत्स्य बीज (स्पॉन) और नर्सरी जाल प्रदान करती है। ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने और मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित राज्य शासन की स्पॉन संवर्धन योजना राज्य के मत्स्य पालकों के जीवन में समृद्धि का नया सवेरा ला रही है। धमतरी जिले के ग्राम पंचायत चरमुडिया निवासी हरिश्चंद्र जांगड़े की सफलता की कहानी इस योजना की प्रभावशीलता का एक मिसाल योग्य उदाहरण है। हाल ही में शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, सांकरा में श्री जांगड़े को 23 लाख स्पॉन जीरा आकार के मछली बीज वितरित किए गए। यह सहायता न केवल उनके व्यवसाय को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का माध्यम बनी है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर कर रही है।

चुनौतियों पर भारी पड़ी शासकीय सहायता मत्स्य पालन से लंबे समय से जुड़े हरिश्चंद्र जांगड़े बताते हैं कि पहले उन्हें निजी स्रोतों से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ता था। इससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ जाती थी और प्रायः बीज की गुणवत्ता को लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती थी। हरिश्चंद्र जांगड़े ने कहा कि सही समय पर गुणवत्तायुक्त बीज मिलना ही मत्स्य पालन की सफलता की कुंजी है। स्पॉन संवर्धन योजना के माध्यम से अब हमें प्रमाणित और स्वस्थ मछली बीज सुलभता से मिल रहा है, जिससे लागत घटी है और मुनाफा बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

वैज्ञानिक संवर्धन से स्वरोजगार और आजीविका को नई गति प्राप्त 23 लाख स्पॉन को वैज्ञानिक पद्धति से संवर्धित कर श्फिंगरलिंगश् एवं गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि आसपास के अन्य मत्स्य पालकों को भी समय पर बीज प्राप्त हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों को मौसमी तालाबों में स्पॉन संवर्धन, तालाब सुधार एवं आवश्यक इनपुट्स के लिए 30 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।
आधुनिक तकनीक से समृद्ध गाँव की ओर मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य केवल बीज वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य उत्पादन का एक आत्मनिर्भर ढांचा तैयार करना है। इसके लिए हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हरिश्चंद्र जांगड़े अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों के सहारे अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं। वे क्षेत्र के अन्य युवाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभर रहे हैं।
सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में मील का पत्थर स्पॉन संवर्धन योजना यह साबित करती है कि सही समय पर मिली सही सरकारी मदद कैसे ग्रामीण आजीविका को सशक्त आधार प्रदान कर सकती है। धमतरी जिले का यह सफल प्रयास समृद्ध किसान-समृद्ध गाँव की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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