ट्रांसपोर्ट कंपनी से 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी का फरार आरोपी गिरफ्तार
‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई, चार माह से फरार था आरोपी
रायगढ़ । रायगढ़ पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए ट्रांसपोर्ट कंपनी से करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में चार माह से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर कंपनी से रकम निकालने के मामले में वांछित था। पुलिस ने उसे दरोगापारा क्षेत्र से गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी दीपक शर्मा (32 वर्ष), निवासी दरोगापारा, रायगढ़ अपने मोहल्ले में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, 24 मार्च 2026 को श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक के संचालक कमल किशोर शाह ने कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी के कर्मचारी प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे। जांच के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर मिलने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया कि सितंबर 2025 से एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान कराया गया। इस दौरान संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ और प्रियंका गुप्ता के बैंक खातों का इस्तेमाल कर कंपनी से करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। मामले में कोतवाली थाना में अपराध क्रमांक 187/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान बिल-वाउचरों में दर्ज वाहन नंबरों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से सत्यापन कराया गया। कई वाहन नंबर दोपहिया और निजी वाहनों के निकले, जिनका ट्रांसपोर्ट कंपनी या माल परिवहन से कोई संबंध नहीं था। वाहन मालिकों ने भी पुलिस को बताया कि उन्होंने कभी संबंधित कंपनी के लिए परिवहन कार्य नहीं किया।
पूछताछ में आरोपी दीपक शर्मा ने स्वीकार किया कि वह कंपनी के ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करता था। विभिन्न वाहन नंबरों का उपयोग कर भुगतान कराया जाता था और जिन लोगों के खातों में रकम भेजी जाती थी, वे कमीशन काटकर शेष राशि आरोपी और उसके साथियों द्वारा बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड और फोन-पे नंबरों पर वापस ट्रांसफर कर देते थे।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी में से लगभग 16 से 17 लाख रुपये प्रकाश मिश्रा और दीपक प्रधान को दिए गए, जबकि उसे करीब 15 लाख रुपये मिले। इनमें से लगभग 4 लाख रुपये उसने अपनी मां के इलाज पर खर्च किए, जबकि शेष राशि व्यक्तिगत खर्चों और घूमने-फिरने में खर्च कर दी।
पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
इस कार्रवाई में उप निरीक्षक ऐनु देवांगन, प्रशिक्षु उप निरीक्षक हर्ष चंद्राकर, सहायक उप निरीक्षक कोसो सिंह, आरक्षक कमलेश यादव तथा आरक्षक कोमल तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत फरार अपराधियों की गिरफ्तारी का अभियान लगातार जारी रहेगा। व्यापारियों और आम नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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