छः सूत्रीय मांगों पर शासन ने शुरू की कार्यवाही

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मुख्यमंत्री निवास से प्राप्त ज्ञापन संबंधित विभागों को भेजकर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश

रायपुर। गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के आम नागरिकों, छात्र-छात्राओं तथा शासकीय सेवकों से संबंधित छः सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य सरकार एवं भारत सरकार से आवश्यक पहल करने का आग्रह किया गया था। इन मांगों के संबंध में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा भी मुख्यमंत्री को अर्द्धशासकीय पत्र के माध्यम से समर्थन प्रदान किया गया था।

एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग ने बताया कि मांग-पत्र पर अब शासन स्तर पर महत्वपूर्ण पहल हुई है। छत्तीसगढ़ शासन, सामान्य प्रशासन विभाग (शासकीय कर्मचारी कल्याण शाखा) द्वारा क्रमांक WELF/1060/2026-GAD-9, दिनांक 21 अगस्त 2026 के माध्यम से ज्ञापन में शामिल मांगों को संबंधित विभागों—अनुसूचित जनजाति विकास विभाग, वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग—को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजा गया है।

शासन के पत्र में संबंधित विभागों से उनके अधिकार क्षेत्र से जुड़े मांग बिंदुओं पर आवश्यक कार्यवाही करने तथा की गई कार्यवाही से मुख्यमंत्री निवास, नेता प्रतिपक्ष एवं संबंधित संघ को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। शासन स्तर से मांगों को संबंधित विभागों तक भेजे जाने के बाद एसोसिएशन ने इसे अपनी मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।

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एसोसिएशन की प्रमुख छः मांगें

1. आय सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये की जाए
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के नागरिकों, छात्र-छात्राओं एवं शासकीय सेवकों के लिए शासकीय योजनाओं एवं छात्रवृत्ति हेतु निर्धारित 2.5 लाख रुपये की आय सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये किए जाने की मांग की गई है।

2. पदोन्नति में आरक्षण लागू किया जाए
आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करते हुए पदोन्नति में आरक्षण का प्रभावी प्रावधान किए जाने की मांग रखी गई है।

3. भर्ती एवं प्रवेश परीक्षा से साक्षात्कार समाप्त किया जाए
भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में Interview (साक्षात्कार) की व्यवस्था समाप्त कर पारदर्शी एवं निष्पक्ष चयन प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई है।

4. पेंशन के लिए पूर्व सेवा अवधि की गणना की जाए
पेंशन भुगतान के लिए पूर्व सेवा काल को मान्यता देते हुए पूर्व सेवा अथवा नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना किए जाने की मांग की गई है।

5. पूर्व नियुक्त शिक्षकों से TET की बाध्यता समाप्त की जाए
पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की बाध्यता समाप्त करने की मांग की गई है, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के पदोन्नति के रास्ते में आ रही बाधा दूर हो सके।

6. संविदा, अनियमित एवं प्लेसमेंट नियुक्तियां बंद कर नियमित भर्ती की जाए
संविदा, अनियमित एवं प्लेसमेंट के माध्यम से नियुक्ति की व्यवस्था समाप्त कर रिक्त नियमित पदों पर नियमित भर्ती किए जाने की मांग की गई है।

मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

प्रांताध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग ने कहा कि संगठन द्वारा उठाई गई छः सूत्रीय मांगों को मुख्यमंत्री निवास के माध्यम से शासन तक पहुंचाया गया था। अब सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मांगों को संबंधित विभागों को भेजकर कार्यवाही के निर्देश देना संगठन के प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि संगठन को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इन मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेंगे। विशेषकर छात्रवृत्ति की आय सीमा, पदोन्नति में आरक्षण, पूर्व नियुक्त शिक्षकों की TET बाध्यता तथा संविदा और प्लेसमेंट व्यवस्था से जुड़े मामलों में निर्णय होने से बड़ी संख्या में नागरिकों एवं शासकीय सेवकों को लाभ मिल सकता है।

कृष्णकुमार नवरंग ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत तथा मांगों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री निवास और सामान्य प्रशासन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब संगठन की नजर संबंधित विभागों द्वारा की जाने वाली आगामी कार्यवाही और शासन के निर्णय पर है।

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