ओखर की गौशाला में 23 गौवंश की मौत का आरोप, लापरवाही पर उठे सवाल

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

ग्रामीणों ने चारा-पानी नहीं मिलने का लगाया आरोप, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

पचपेड़ी/बिलासपुर। ग्राम पंचायत ओखर, तहसील एवं थाना पचपेड़ी क्षेत्र स्थित ‘गौशाला गौ धाम वासुदेव सेवा समिति’ में 23 गौवंश की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने गौशाला प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार गौशाला में रखे गए गौवंश को पर्याप्त मात्रा में चारा और पीने का पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था। उनका आरोप है कि लंबे समय तक उचित देखभाल नहीं होने के कारण कई गौवंश की हालत बिगड़ती गई और अंततः 23 गौवंश की मौत हो गई। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण प्रशासनिक जांच और आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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गौशाला व्यवस्था पर उठे सवाल

बताया गया कि शासन की योजना के तहत गौ धाम वासुदेव सेवा समिति ओखर को गौवंश की देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं स्थानीय स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मचारियों की भूमिका भी व्यवस्था की निगरानी से जुड़ी बताई जा रही है। ऐसे में गौशाला में बड़ी संख्या में गौवंश की मौत होने से व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गौशाला में चारा, पानी और पशु चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। ग्रामीणों ने मामले में जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की है।

वीडियो बनाकर सुरक्षित किए सबूत

घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने गौशाला पहुंचकर वहां की स्थिति का जायजा लिया। बताया गया कि परिसर में मृत गौवंश पड़े मिले। मौके की स्थिति का वीडियो भी बनाया गया है, जिसे ग्रामीणों ने मामले की जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की बात कही है।

कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग

घटना को लेकर ग्रामीणों ने बिलासपुर कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा जांच में यदि लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित समिति पदाधिकारियों, जिम्मेदार पंचायत प्रतिनिधियों, सचिव एवं अन्य दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि मृत गौवंश का आवश्यक परीक्षण कराकर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए और गौशाला में वर्तमान में मौजूद पशुओं के लिए तत्काल चारा, पानी, उपचार तथा सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

जांच के बाद स्पष्ट होगी जिम्मेदारी

फिलहाल 23 गौवंश की मौत के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि जांच में पशुओं की देखभाल में लापरवाही, चारा-पानी की कमी या पशु क्रूरता से संबंधित तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

घटना ने गौशाला संचालन और पशु संरक्षण व्यवस्था की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर है।

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