हाईकोर्ट से याचिकाकर्ता को झटका: पचपेड़ी थाने में दर्ज FIR रद्द करने से इनकार, याचिका खारिज
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
पचपेड़ी पुलिस नरेंद्र मोटवानी को आखिर कब गिरफ्तारी करेगी?

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिलासपुर जिले के पचपेड़ी थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले की प्राथमिकी (FIR) को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।

क्या था मामला?
तोरवा (बिलासपुर) निवासी नरेंद्र कुमार मोटवानी के खिलाफ थाना पचपेड़ी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(5) और 309 के तहत अपराध क्रमांक 204/2026 दर्ज किया गया था। इस मामले में पीड़ित पक्ष पीयूष गंगवानी की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई कर रही है।
इस प्राथमिकी और इससे जुड़ी समस्त कानूनी कार्रवाइयों को रद्द (क्वैश) कराने के लिए नरेंद्र मोटवानी ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
कोर्ट में राज्य शासन का तर्क
सुनवाई के दौरान राज्य शासन के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने पीठ को अवगत कराया कि इसी मामले में शिकायतकर्ता पहले भी हाईकोर्ट पहुंचा था। पूर्व में दायर याचिका (WPCR 425/2026) का निपटारा करते हुए कोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को पुलिस को निष्पक्ष, कानूनी दायरे में और बिना किसी बाहरी दबाव के तय समय-सीमा में जांच पूरी कर सक्षम अदालत में चालान पेश करने का निर्देश दिया था। राज्य के वकील ने बताया कि कोर्ट के पूर्व आदेशानुसार विवेचना अब अंतिम चरण में है और जल्द ही पूरी होने वाली है।
अदालत का फैसला
राज्य शासन के तर्कों को संज्ञान में लेते हुए युगलपीठ ने जांच प्रक्रिया के इस स्तर पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी है कि यदि वह पुलिस जांच के परिणाम या अंतिम रिपोर्ट से असंतुष्ट रहता है, तो वह कानून के अनुसार आगे उचित विधिक कदम उठाने के लिए स्वतंत्र होगा।
देखिए आदेश 👇

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