बैलाडीला की पहाड़ियों के पीछे बसे दुर्गम गांवों तक पहुँचेगी पेयजल सुविधा

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रायपुर । बैलाडीला की पहाड़ियों के पीछे बसे दूरस्थ और दुर्गम गांवों में वर्षों से व्याप्त पेयजल संकट अब समाप्त होने की ओर है। भौगोलिक विषमताओं और कठिन रास्तों के कारण विकास की मुख्यधारा से कटे इन ग्राम पंचायत हिरोली के अंतर्गत आने वाले बड़ेपल्ली, पुरंगेल और लावा जैसे गांव अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रशासन ने कुआं खनन के जरिए एक नई उम्मीद जगाई है। इन गांवों में 10 कुओं के खनन कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की। वर्तमान में 4 कुओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

विकास की राह में भौगोलिक चुनौतियां ग्राम पंचायत हिरोली के अंतर्गत आने वाले बड़ेपल्ली, पुरंगेल और लावा जैसे गांव अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित हैं। यहां पक्की सड़कों का अभाव और भारी वाहनों की पहुंच न होना पेयजल व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी बाधा थी। बोरिंग मशीनें इन गांवों तक नहीं पहुंच पाने के कारण ग्रामीण लंबे समय से स्वच्छ जल के लिए संघर्ष कर रहे थे।

कलेक्टर की पहल 10 कुओं को मिली स्वीकृति ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव ने क्षेत्र का भ्रमण किया और तत्काल 10 कुओं के खनन की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की। प्रशासन की इस सक्रियता का परिणाम अब धरातल पर दिखने लगा है। बेंगपाल यहाँ पूर्व में उपलब्ध 5 हैंडपंपों के साथ अब 2 नए कुओं का निर्माण पूरा हो चुका है। बड़ेपल्ली में 1 हैंडपंप वाले इस गांव में 2 कुओं का खनन कार्य पूर्ण कर लिया गया है। पुरंगेल में यहाँ 1 नए कुएं का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है। लावा में अब तक कोई हैंडपंप नहीं था। यहाँ कुआं निर्माण हेतु सामग्री पहुंचाई जा चुकी है और मई माह के अंत तक कार्य पूर्ण होने की संभावना है।

भविष्य की तैयारी सोलर आधारित जल व्यवस्था पारंपरिक कुओं के साथ-साथ प्रशासन आधुनिक समाधानों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। क्रेडा के माध्यम से बेंगपाल में सोलर आधारित पेयजल प्रणाली के लिए यील्ड टेस्टिंग (पानी की उपलब्धता की जांच) की जा रही है। सफल परीक्षण के बाद ग्रामीणों को सौर ऊर्जा संचालित शुद्ध पेयजल की निरंतर सुविधा मिल सकेगी।

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