अब सिर्फ घर नहीं चला रहीं महिलाएं, “रानी मिस्त्री” बन घर भी खड़ा कर रही

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रानी मिस्त्रियों का गांव” बना राम्हेपुर, 35 महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

सुशासन तिहार में पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहल को सराहा

प्रोजेक्ट उन्नति अंतर्गत रानी मिस्त्री के रूप में प्रशिक्षित होकर ग्रामीण महिलाओं को मिला आजीविका का नया जरिया

रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर मिल रहा रोजगार
रिपोर्टर✒️कमलेश सिंह
कवर्धा। कभी दूसरों के निर्माण कार्यों में सिर्फ ईंट उठाने और मसाला ढोने तक सीमित रहने वाली ग्राम राम्हेपुर की महिलाएं आज खुद मकानों की दीवारें खड़ी कर रही हैं। जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा के इस छोटे से गांव में अब महिलाएं “रानी मिस्त्री” बनकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। गांव की कमला बाई, फूलमती और सावित्री जैसी महिलाएं बताती हैं कि पहले वे निर्माण कार्यों में केवल रेजा और हेल्पर का काम करती थीं। दिनभर मेहनत के बाद भी मजदूरी कम मिलती थी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पाती थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 30 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद वे खुद दीवार निर्माण, प्लास्टरिंग, नाप-जोख, शटरिंग और निर्माण गुणवत्ता की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा के ग्राम राम्हेपुर में प्रोजेक्ट उन्नति के तहत 35 ग्रामीण महिलाओं को “रानी मिस्त्री” के रूप में प्रशिक्षित किया गया। आरसेटी द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में महिलाओं को केवल राजमिस्त्री का तकनीकी ज्ञान ही नहीं दिया गया, बल्कि शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने बिल्डिंग मटेरियल की गुणवत्ता देखने,ईटों की जोड़ाई, मसाला बनाना सीमेंट-रेत अनुपात,सही नाप-जोख,प्लास्टरिंग, दीवार निर्माण,सेंट्रिंग, वाटर लेवल सेटिंग, सुरक्षा उपाय एवं निर्माण गुणवत्ता नियंत्रण का व्यावहारिक ज्ञान के साथ ही सीखा कि अच्छी गुणवत्ता वाली ईंट और सामग्री की पहचान कैसे की जाती है, मसाले में सीमेंट और रेत का सही अनुपात क्या होना चाहिए, दीवार की सीध और मजबूती कैसे सुनिश्चित की जाती है और निर्माण कार्य में वाटर लेवल सेटिंग एवं गुणवत्ता नियंत्रण क्यों जरूरी है।
आज यही महिलाएं गांव और आसपास के क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण सहित अन्य निर्माण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। पहले जहां निर्माण कार्य पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, वहीं अब महिलाएं खुद राजमिस्त्री बनकर समाज की सोच बदल रही हैं। राम्हेपुर की इन महिलाओं की कहानी केवल रोजगार पाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, सम्मान और सामाजिक बदलाव की कहानी है। जिन हाथों ने अब तक घर चलाने की जिम्मेदारी उठाई है वही हाथ अब लोगों के सपनों का घर खड़ा कर रहे हैं।

सुशासन तिहार में पहुंचे मुख्यमंत्री ने पहल को सराहा
इस पहल को उस समय नई पहचान मिली जब सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आकस्मिक रूप से जनपद पंचायत पंडरिया के ग्राम लोखान पहुंचे। वहां पंचायत भवन निर्माण कार्य में लगी रानी मिस्त्रियों के साथ उन्होंने स्वयं ईंट जोड़ाई की और महिलाओं के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

प्रशिक्षण से हुआ कौशल उन्नयन-कलेक्टर गोपाल वर्मा

कलेक्टर कबीरधाम गोपाल वर्मा ने बताया की ग्राम पंचायत राम्हेपुर की 35 महिलाओं को आरसेटी द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। हमारा उद्देश्य है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अधिक से अधिक रोजगारोन्मुखी कार्यों से जोड़ा जाए। रानी मिस्रियों के रूप में प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं को उनके गांव एवं आसपास के क्षेत्रो में निर्माण कार्यों से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। पहले जहां मिस्रियों का काम सिर्फ पुरुष ही किया करते थे वही अब इन कार्यों से महिलाओं ने जुड़कर सभी के लिए एक आदर्श स्थापित किया है। इन्हें अच्छा काम मिल रहा है और विभिन्न निर्माण कार्यों में कम से कम 410 रुपए प्रतिदिन की आमदनी कमा रहे हैं। मनरेगा के तहत पक्के निर्माण कार्यों में प्रतिदिन 465 रुपए का भुगतान किया जाता है। जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी रानी मिस्त्री के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है जिससे आजीविका के नए कार्यों से महिलाएं आत्मनिर्भर हो सके।

रानी मिस्रियों के रूप में महिलाएं हो रही आत्मनिर्भर-सीईओ अभिषेक अग्रवाल

इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री जनमन आवास एवं प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में प्रगति लाने के लिए ग्रामीण महिलाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा। जनपद पंचायत सहसपुर
लोहारा अंतर्गत 35 महिलाओं का प्रशिक्षण हो चुका है। प्रशिक्षण उपरांत महिला राजमिस्त्रियों द्वारा आवास को समय पर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने में मदद मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन हो रहा है।

एक नजर प्रोजेक्ट उन्नति अंतर्गत महिला मिस्रियों के प्रशिक्षण पर

उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी नरेगा योजना से विगत वर्षों में 60 दिनों का रोजगार प्राप्त कर ग्रामीण महिलाएं पहले ही लाभान्वित हो चुकी है। ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास से जोड़ने एवं आत्मनिर्भर बनाने यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पूरे प्रदेश में अभी तक 1500 से अधिक ग्रामीण महिलाएं आरसेटी केंद्रों से रानी मिस्त्री के रूप में प्रशिक्षित होकर आत्मनिर्भर हो चुकी है। इसी क्रम में आरसेटी केंद्र कवर्धा एवं जिला पंचायत कबीरधाम द्वारा 30 दिवसीय प्रोजेक्ट उन्नति के तहत 35 रानी मिस्रियों का प्रशिक्षण आयोजित कराया गया।राजमिस्त्री के रूप में प्रशिक्षित महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर गांव में ही खुले हुए हैं। प्रशिक्षण अवधि के दौरान महिलाओं को महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत 261 रुपया के मान से मजदूरी राशि प्रोत्साहन स्वरूप उनके बैंक खाते में प्राप्त हुआ है। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को निर्माण कार्यों की तकनीकी जानकारी और गुणवत्ता नियंत्रण का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। साथ ही महिलाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान कर प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण जैसे शासन के महत्वपूर्ण योजना में त्वरित रूप से रोजगार देकर निर्माण कार्यों में प्रगति लाना है।

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