‘ऑपरेशन अंकुश’ का खौफ: रायगढ़ पुलिस के बढ़ते दबाव के आगे टूटे सट्टा खाईवालों के हौसले, बड़े बुकी ‘गुड्डा सरदार’ ने एसपी ऑफिस पहुंचकर किया सरेंडर

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हवाला और आईपीएल सट्टेबाजी से हमेशा के लिए तौबा कर मुख्यधारा में लौटने की खाई कसम; एसएसपी बोले- ‘अवैध धंधा छोड़ें, पुलिस की रडार से बचना नामुमकिन’

रायगढ़। जिले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्री शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे “ऑपरेशन अंकुश” ने ऑनलाइन आईपीएल सट्टा सिंडिकेट की कमर तोड़कर रख दी है। पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी और चौतरफा घेराबंदी के खौफ से फरार आरोपियों में हड़कंप मचा हुआ है। इसी कड़ी में आज रायगढ़ के एक और बड़े सट्टा खाईवाल जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार के हौसले पस्त हो गए और उसने सीधे एसपी कार्यालय पहुंचकर एसएसपी के समक्ष सरेंडर कर दिया। आरोपी ने अपराध का रास्ता छोड़कर हमेशा के लिए मुख्यधारा में लौटने और नया जीवन शुरू करने की बात कही है।

“फरारी में हर पल सता रहा था डर, केवल जेल और सामाजिक अपमान ही इसका अंत”

एसपी कार्यालय में सरेंडर करने के बाद गोपी टॉकीज (हैप्पी ट्रेवल्स के बगल) निवासी आरोपी जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार (40 वर्ष) ने अपना दर्द बयां किया। उसने स्वीकार किया कि पुलिस की लगातार दबिश के कारण वह फरारी के दौरान भयंकर डर और मानसिक तनाव में जी रहा था। उसे हर वक्त अपने परिवार के भविष्य की चिंता सताती थी।
आरोपी ने अन्य सटोरियों और युवाओं से अपील करते हुए कहा:

“इस अवैध और आसान कमाई वाले धंधे का अंत केवल जेल, आर्थिक बर्बादी और सामाजिक बदनामी है। ऑनलाइन जुआ-सट्टा खेलने वाले और इसका नेटवर्क चलाने वाले युवा तुरंत इस दलदल से दूर हो जाएं, वरना पूरा परिवार तबाह हो जाता है।”

एसएसपी का सख्त संदेश: “अपराध छोड़ें, फरारी ज्यादा दिन नहीं चलती”

सरेंडर के दौरान एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने आरोपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए सख्त समझाइश दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि रायगढ़ पुलिस की नजर जिले के हर एक अवैध और संदिग्ध कारोबार करने वाले पर है। अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो, कानून के लंबे हाथों से ज्यादा दिन बच नहीं सकता। उन्होंने युवाओं को आसान कमाई के शॉर्टकट और ऑनलाइन सट्टे के चंगुल से दूर रहने की हिदायत दी है।

करन चौधरी गैंग का मुख्य गुर्गा था जसमीत, रायपुर से गोवा तक फैले थे तार

पुलिस की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि सरेंडर करने वाला जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार कोई छोटा-मोटा मोहरा नहीं, बल्कि मुख्य खाईवाल करन चौधरी उर्फ करन अग्रवाल के पूरे सट्टा नेटवर्क का मुख्य संचालक था। वह खुद भी बड़े पैमाने पर खाईवाली करता था। घरघोड़ा में दबोचे गए सटोरिये गौतम भोजवानी और रायपुर के बड़े सट्टा माफिया मोहित सोमानी व प्रकाश वाधवानी के साथ जसमीत के सीधे वित्तीय और सट्टा संचालन के पुख्ता प्रमाण पुलिस को मिले हैं। फिलहाल, साइबर सेल थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक द्वारा आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की जप्ती और हवाला रकम के लेन-देन (मनी ट्रेल) की बारीकी से जांच की जा रही है।

करोड़ों का कैश, नोट गिनने की मशीन और गोवा विला रेड: अब तक की सिलसिलेवार कार्रवाई

रायगढ़ पुलिस ने इस हाईटेक आईपीएल सट्टा सिंडिकेट की परत-दर-परत जिस तरह खोली है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। अब तक की प्रमुख कार्रवाइयां इस प्रकार हैं:

तारीख / स्थान की गई कार्रवाई और जप्ती गिरफ्तार प्रमुख आरोपी 26 अप्रैल (शुरुआती रेड)
कोतवाली व घरघोड़ा रायगढ़ और घरघोड़ा में एक साथ दबिश। 7 मोबाइल और 15,490 रुपये कैश जप्त। छ.ग. जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज। सोनू देवांगन, हर्षित देवांगन, भरत गोयल, गौतम भोजवानी, लक्ष्मीनारायण सिदार, सागर गुप्ता। पूछताछ के बाद (फाइनेंशियल ट्रेल)
कृष्ण प्राइड टावर सट्टे की ब्लैक मनी को ठिकाने लगाने वाले मनी मूवमेंट नेटवर्क का भंडाफोड़। 1 करोड़ 2 लाख 81 हजार 300 रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन और मोबाइल जप्त। मुख्य खाईवाल करन चौधरी उर्फ करन अग्रवाल, पुष्कर अग्रवाल और उसके पिता सुनील अग्रवाल। अगला कदम (इंटरस्टेट रेड)
गोवा (कैंडोलिम बीच विला) गोवा के आलीशान किराए के विला में छापा। मध्य भारत के सबसे बड़े मन्नु नथनी गैंग के साथ सट्टा चलाते रंगे हाथ पकड़े गए। 10 मोबाइल जप्त। अमित मित्तल, मोहित सोमानी, प्रकाश वाधवानी, आकाश मोटवानी, राहुल खंडेलवाल उर्फ बाबू और सुलभ खंडेलवाल।

पेट्रोल पंप और मेडिकल स्टोर के जरिए होता था हवाला का खेल

पुलिस इन्वेस्टिगेशन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि आरोपी करन चौधरी और जसमीत बग्गा सट्टे से आने वाली करोड़ों की रकम को सीधे अपने बैंक खातों में नहीं लेते थे। वे इस काली कमाई को परिचित कारोबारियों, पेट्रोल पंपों, मेडिकल स्टोरों और अन्य कमर्शियल चैनलों में कैश डंप कर ‘व्हाइट’ करने का खेल खेल रहे थे, जिसे बाद में हवाला के जरिए आगे भेजा जाता था। पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य सफेदपोश मददगारों की कुंडली खंगालने में जुटी है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने तय हैं।

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