डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1 करोड़ की ठगी: बिलासपुर साइबर पुलिस ने महाराष्ट्र से पिता-पुत्र को दबोचा, खाते में मिले 54 लाख

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आतंकवादी कनेक्शन का डर दिखाकर सीनियर सिटीजन महिला को किया था ‘डिजिटल अरेस्ट’; कमीशन के लालच में नेपाल जाकर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे आरोपी

बिलासपुर। बिलासपुर रेंज साइबर थाना पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र के भंडारा जिले से पिता और पुत्र को गिरफ्तार किया है, जो साइबर अपराधियों के लिए “म्यूल अकाउंट” (किराए के खाते) उपलब्ध कराने का काम कर रहे थे। आरोपियों के बैंक खाते में ठगी की राशि में से अकेले 54 लाख 40 हजार रुपये प्राप्त होने की पुष्टि हुई है।

वरिष्ठ नागरिक महिला को बनाया शिकार

साइबर ठगों ने बिलासपुर की एक वरिष्ठ नागरिक महिला को अपना निशाना बनाया। ठगों ने व्हाट्सएप मैसेज और वीडियो कॉल के जरिए खुद को बड़ी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया। उन्होंने महिला को डराया कि उनका नाम एक आतंकवादी संगठन से जुड़ गया है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी की वारंट जारी होने वाला है।
पीड़िता को कई घंटों तक “डिजिटल अरेस्ट” (कैमरे के सामने रहने को मजबूर करना) रखा गया। गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी का ऐसा खौफ पैदा किया गया कि डरी-सहमी महिला ने ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

जांच की आंच पहुंची महाराष्ट्र, पिता-पुत्र गिरफ्तार

मामले की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस महानिरीक्षक (IG) राम गोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर रेंज साइबर थाना की टीम गठित की गई। तकनीकी जांच और बैंक ट्रांजैक्शन के विश्लेषण में आईसीआईसीआई बैंक (ICICI) के एक खाते का पता चला, जिसमें 54.40 लाख रुपये जमा हुए थे। यह खाता नेमतउल्लाह मंसूरी का निकला।
निरीक्षक कामिल हक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने महाराष्ट्र के भंडारा जिले के वरठी में दबिश दी और आरोपी नेमतउल्लाह मंसूरी (25 वर्ष) और उसके पिता अब्दुल कयूम अंसारी (47 वर्ष) को हिरासत में लिया।

नेपाल कनेक्शन और 2% कमीशन का खेल: पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी नेमतउल्लाह सिर्फ 2 प्रतिशत कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को बेच देता था। आरोपी का पिता अब्दुल कयूम भी इस धंधे में शामिल था और कमीशन के लिए मुख्य ठगों के संपर्क में रहता था। यह गिरोह इतना शातिर है कि ये बैंक खाते और केवाईसी (KYC) उपलब्ध कराने के लिए नेपाल की राजधानी काठमांडू तक जाते थे।

म्यूल अकाउंट्स पर पुलिस का सख्त प्रहार

बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में जो लोग अपने बैंक खाते ठगों को किराए पर देते हैं, वे भी उतने ही अपराधी हैं जितने मुख्य ठग। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4), 308(6), 3(5) बीएनएस एवं आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें बिलासपुर लाया गया है।
इन पर हुई कार्रवाई:

  1. मोहम्मद नेमतउल्लाह मंसूरी (पुत्र) – निवासी गांधी वार्ड, भंडारा (महाराष्ट्र)
  2. अब्दुल कयूम अंसारी (पिता) – निवासी गांधी वार्ड, भंडारा (महाराष्ट्र)

सावधानी की अपील

साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी जांच एजेंसी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। यदि कोई ऐसा कॉल आए, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या नजदीकी साइबर थाने में सूचना दें। पुलिस अब इस नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं की तलाश में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जुटी हुई है।

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