दो दिन का अल्टीमेटम: अपोलो फार्मेसी पर कार्रवाई से पीछे हटा प्रशासन, अवैध कब्जे को लेकर शहर में गरमाई सियासत
पुराना बस स्टैंड में कार्रवाई करने पहुंची टीम बैरंग लौटी, राजनीतिक हस्तक्षेप से बढ़े सवाल
मुंगेली । शहर के पुराना बस स्टैंड स्थित अपोलो फार्मेसी पर कथित अवैध कब्जा हटाने पहुंची नगर पालिका और प्रशासनिक टीम मंगलवार को भारी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। नजूल भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत के बाद मौके पर पहुंचा सरकारी अमला राजनीतिक हस्तक्षेप और विरोध के बीच बिना कोई ठोस कार्रवाई किए वापस लौट गया। पूरे घटनाक्रम के बाद शहर में प्रशासनिक निष्पक्षता और कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं सूत्रों के अनुसार संबंधित पक्ष को दो दिन का अल्टीमेटम दिए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है।
नजूल भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत के बाद पहुंची थी टीम
जानकारी के अनुसार पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में संचालित अपोलो फार्मेसी द्वारा नजूल भूमि पर कथित अतिक्रमण किए जाने की शिकायत प्रशासन तक पहुंची थी। शिकायत के आधार पर नगर पालिका और प्रशासन की संयुक्त टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची। टीम के पहुंचते ही क्षेत्र में हलचल बढ़ गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।
बताया जा रहा है कि प्रशासनिक टीम अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करती, उससे पहले ही कुछ प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं का मौके पर पहुंचना शुरू हो गया। इसके बाद माहौल अचानक गर्मा गया और कार्रवाई को लेकर विरोध शुरू हो गया।
राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच घंटों चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद कुछ नेताओं ने कार्रवाई का विरोध करते हुए अधिकारियों से बहस शुरू कर दी। इस दौरान काफी देर तक तनातनी और हंगामे की स्थिति बनी रही। प्रशासनिक टीम भी किसी ठोस तैयारी और स्पष्ट रणनीति के बिना नजर आई।
करीब घंटों तक चले घटनाक्रम के बाद आखिरकार प्रशासनिक अधिकारी बिना कोई कार्रवाई किए वापस लौट गए। न तो अवैध कब्जा हटाया गया और न ही किसी प्रकार की सीधी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई।
‘छोटों पर सख्ती, रसूखदारों पर नरमी’—लोगों में नाराजगी
कार्रवाई अधूरी रहने के बाद स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन अक्सर छोटे दुकानदारों और कमजोर वर्गों पर सख्ती दिखाता है, लेकिन जब मामला प्रभावशाली लोगों या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्तियों से जुड़ता है तो कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमि सरकारी या नजूल की है और अतिक्रमण हुआ है, तो कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। प्रशासन को बिना भेदभाव निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
दो दिन का अल्टीमेटम
मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संबंधित भूमि के नक्शे और नजूल रिकॉर्ड में कुछ तकनीकी त्रुटियां सामने आई हैं। स्थिति स्पष्ट करने के लिए समिति गठित की गई है, जो सीमांकन, दस्तावेज और भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच करेगी। सूत्रों के अनुसार संबंधित पक्ष को दो दिन का समय दिए जाने की बात भी सामने आई है, जिसके बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बीच बढ़ी चर्चा
अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख पहले से ही बेहद सख्त रहा है। न्यायालय ने कई मामलों में स्पष्ट कहा है कि अवैध निर्माण को केवल समय बीत जाने या अधिकारियों की निष्क्रियता के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
नियमितीकरण पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रभाव शुल्क या कंपाउंडिंग फीस लेकर अवैध निर्माण को नियमित करने की प्रवृत्ति कानून के खिलाफ है। अवैध निर्माण को वैध बनाने के प्रयास न्यायिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं माने जा सकते।
दोषियों को राहत नहीं
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी अदालत से राहत मिलने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। कानून का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्ग, रेलवे परिसरों और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कई मामलों में टास्क फोर्स बनाकर अवैध ढांचों को हटाने तक के आदेश जारी किए गए हैं।
शहर में चर्चा का विषय बना मामला
पुराना बस स्टैंड स्थित अपोलो फार्मेसी प्रकरण अब शहर में चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि दो दिन बाद प्रशासन वास्तव में कार्रवाई करेगा या मामला फिर फाइलों में सिमटकर रह जाएगा। फिलहाल शहर की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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