नट समुदाय की महिलाओं और किशोरियों के लिए माहवारी स्वच्छता स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित
माहवारी प्रकृति का उपहार है, कोई दोष या शर्म का विषय नहीं – डॉ. मनीष बंजारा
मुंगेली । महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नट समुदाय की महिलाओं एवं किशोरियों के बीच माहवारी स्वच्छता स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य माहवारी से जुड़े मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक संकोच को दूर कर सुरक्षित एवं स्वस्थ माहवारी प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं और किशोरियों से संवाद करते हुए डॉ. मनीष बंजारा ने कहा कि “माहवारी एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है। यह कोई दोष, बीमारी या शर्म का विषय नहीं है। अब समय आ गया है कि हम माहवारी के विषय में खुलकर बात करें, ताकि हमारी बेटियां और महिलाएं स्वस्थ, आत्मविश्वासी और सम्मानजनक जीवन जी सकें।”
उन्होंने बताया कि आज भी अनेक महिलाएं और किशोरियां जानकारी के अभाव, सामाजिक संकोच तथा गलत धारणाओं के कारण विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं। सही जानकारी, स्वच्छता एवं समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से संक्रमण और अन्य जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
शिविर में महिलाओं एवं किशोरियों को माहवारी के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, स्वच्छ सैनिटरी पैड के उपयोग, सुरक्षित निपटान तथा संतुलित पोषण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर नट समुदाय की महिलाओं एवं किशोरियों को सैनिटरी पैड भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं एवं अभिभावकों को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव हेतु एचपीवी टीकाकरण के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही समुदाय में प्रचलित कुछ हानिकारक पारंपरिक प्रथाओं पर भी चर्चा की गई। बच्चों को निमोनिया या अन्य बीमारियों से बचाने के नाम पर पेट में गर्म लोहे की छड़ से दागने की प्रथा को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताते हुए ऐसी स्थिति में मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की गई।
गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करते हुए बताया गया कि अस्पताल में प्रसव कराने से मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है तथा जटिलताओं की स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध हो पाता है।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश था कि “जब माहवारी पर खुलकर बात होगी, तभी महिलाओं का स्वास्थ्य, सम्मान और सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा।” स्वास्थ्य विभाग ने सभी समुदायों से माहवारी के प्रति सकारात्मक सोच अपनाने तथा बेटियों को सही एवं वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करने की अपील की।
इस अवसर पर किशोर उइके, त्रिवेणी मरकाम ,मितानिन सविता साहू, वार्ड पंच अशोक नट सहित समुदाय के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
संदेश
“माहवारी पर चुप्पी नहीं, संवाद जरूरी है। जागरूकता ही स्वस्थ, सम्मानित और सशक्त समाज की पहचान है।”

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