सफलता की नई इबारतः आधुनिक मशीनों से सँवर रही धमतरी की खेती 10 गाँवों में गूँजेगी डीएसआर की गूँज
रायपुर । बदलते दौर के साथ छत्तीसगढ़ का अन्नदाता भी अब पारंपरिक खेती की रूढ़ियों को छोड़ आधुनिकता की राह पर चल पड़ा है। विकसित धमतरी के संकल्प को साकार करने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया। जिले के कुरूद विकासखंड में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम ने क्षेत्र के 10 गाँवों के किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोल दिए हैं।
सीड ड्रिल मशीनों की सौगातः कस्टम हायरिंग सेंटरों को मजबूती कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च एंड डेवलपमेंट संस्था द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र चर्रा (कुरूद) में आयोजित एक गरिमामय समारोह में जिले के 10 चयनित गाँवों के कस्टम हायरिंग सेंटरों के लिए आधुनिक सीड ड्रिल मशीनों का वितरण किया गया। इन मशीनों के मिलने से अब छोटे और सीमांत किसानों को भी कम लागत पर आधुनिक कृषि यंत्र आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।

लाभान्वित होने वाले गाँव : धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक इस योजना के तहत कन्हारपुरी, मोंगरा, कुर्रा, देवरी, राखी, गातापार, भैसबोड़, कुहकुहा, अटंग और बकली को लाभान्वित किया गया है। इस अवसर पर (कार्ड) फाउंडेशन और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कृषक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को धान की सीधी कतार बुवाई (डायरेक्ट सीडिंग राईस) तकनीक के गुर सिखाए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक धमतरी के किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाली है क्योंकि इससे पारंपरिक रोपा पद्धति की तुलना में बीज और श्रम (मजदूरी) का खर्च बेहद कम हो जाता है। इस तकनीक से पानी की भारी बचत होती है, जो जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। कम लागत और वैज्ञानिक रख-रखाव से फसल की उत्पादकता और शुद्ध लाभ में सीधा इजाफा होता है।
प्रशासन का संकल्पः नवाचार से बढ़ेगी किसानों की आय सफलता की इस कहानी को प्रशासनिक नेतृत्व का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। मामले पर खुशी जाहिर करते हुए कलेक्टर ने कहा कि राज्य शासन किसानों के हित के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकसित धमतरी के निर्माण में कृषि क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम है। इन आधुनिक तकनीकों और कृषि यंत्रीकरण के जरिए हम छोटे से छोटे किसान की उत्पादन क्षमता और आय को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
एक साझा प्रयास, एक नया सवेरा इस ऐतिहासिक बदलाव के साक्षी कृषि विभाग के उप संचालक,कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता सहित कार्ड संस्था के लोकेशन इंचार्ज और उनकी पूरी टीम बनी।कार्यक्रम के समापन पर जब अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर सीड ड्रिल मशीनों को गाँवों की ओर रवाना किया, तो वह केवल मशीनों का प्रस्थान नहीं था, बल्कि वह धमतरी के 10 गाँवों की आर्थिक समृद्धि और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम था। निश्चित ही, यह अनूठी पहल छत्तीसगढ़ के कृषि इतिहास में सफलता का एक नया अध्याय लिखेगी।

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