रायपुर में अवैध डीजल-पेट्रोल के काले कारोबार का बड़ा भंडाफोड़, 35 लाख से अधिक का जखीरा जब्त, चार आरोपी गिरफ्तार
रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध ईंधन कारोबार के खिलाफ पुलिस कमिश्नरेट की कार्रवाई में एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। थाना कबीर नगर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कान्हा ढाबा के पीछे स्थित ई.पी. रोलिंग मिल के पास छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध रूप से संग्रहित डीजल और पेट्रोल बरामद किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए 14,100 लीटर ईंधन, एक टैंकर, नकदी और अन्य उपकरण जब्त किए हैं। जब्त सामग्री की कुल कीमत 35 लाख 45 हजार 770 रुपये आंकी गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि कबीर नगर थाना क्षेत्र में कुछ लोग अवैध रूप से पेट्रोल और डीजल का भंडारण कर उसकी कटिंग तथा ऊंचे दामों पर बिक्री का कारोबार संचालित कर रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कान्हा ढाबा के पीछे ई.पी. रोलिंग मिल के पास दबिश दी, जहां अवैध ईंधन का बड़ा जखीरा मिला।
बिना लाइसेंस चल रहा था कारोबार
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपी बिना किसी वैध लाइसेंस या अनुज्ञप्ति के बड़ी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण कर रहे थे। सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी। जिस स्थान पर ईंधन रखा गया था, वहां किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं थी। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई थी।
पुलिस का मानना है कि आरोपी अवैध रूप से ईंधन संग्रहित कर उसकी रीसेलिंग और कटिंग के जरिए मोटा मुनाफा कमाने की योजना पर काम कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस कारोबार का नेटवर्क कई अन्य क्षेत्रों तक फैला हो सकता है।
14,100 लीटर ईंधन बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में पेट्रोल और डीजल बरामद किया। जब्त सामग्री में 8 ड्रमों में भरा हुआ 1,600 लीटर पेट्रोल, 3 ड्रमों में रखा 500 लीटर डीजल तथा एक टैंकर क्रमांक सीजी 07 बीए 8727 में भरा 12,000 लीटर डीजल शामिल है।
इसके अलावा पुलिस ने 1 लाख 30 हजार रुपये नगद, एक मोटर पंप, दो कीप (चाड़ी) और एक कटिंग ड्रम भी जब्त किया है। पुलिस के अनुसार इन उपकरणों का उपयोग ईंधन निकालने और स्थानांतरित करने में किया जा रहा था।
चार आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में ओमप्रकाश साव उर्फ कालिया (38 वर्ष), उमेश साव (55 वर्ष), रामजी यादव (45 वर्ष) और धर्मेंद्र साव (45 वर्ष) शामिल हैं। आरोपी रायपुर और दुर्ग जिले के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी हैं।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों से यह जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है कि ईंधन कहां से लाया जाता था, किसे बेचा जाता था और इस कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस को आशंका है कि इस अवैध कारोबार में अन्य लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है।
पुलिस खंगाल रही सप्लाई नेटवर्क
पुलिस अब मामले के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इतनी बड़ी मात्रा में डीजल और पेट्रोल आखिर कहां से प्राप्त किया गया और इसे किन क्षेत्रों में खपाने की तैयारी थी। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर अवैध ईंधन कारोबार से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं औद्योगिक, परिवहन या अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए मिलने वाले ईंधन की अवैध निकासी कर उसे काले बाजार में तो नहीं बेचा जा रहा था। यदि ऐसा पाया जाता है तो मामले में और भी गंभीर धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध ईंधन कारोबार न केवल राजस्व को नुकसान पहुंचाता है बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। इसलिए ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
पुलिस कमिश्नरेट का सख्त संदेश
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि राजधानी में अवैध कारोबार, कालाबाजारी और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। पेट्रोल, डीजल, गैस तथा अन्य ज्वलनशील पदार्थों के अवैध भंडारण और बिक्री में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस बड़ी कार्रवाई को राजधानी में अवैध ईंधन कारोबार के खिलाफ हाल के वर्षों की महत्वपूर्ण सफलताओं में माना जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि मामले की विस्तृत जांच से पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा और अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सकेगा।

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