कर्रा कोल वाशरी विस्तार: ‘गुपचुप जनसुनवाई’ पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बोले- पहले से ही सांस लेना मुहाल
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
गतौरा स्टेशन से जेके कॉलेज तक काली डस्ट की चादर, फसलें चौपट… अब विस्तार की तैयारी, ग्रामीणों ने दी हाईकोर्ट-चक्काजाम की चेतावनी
बिलासपुर। ग्राम कर्रा में हिन्द एनर्जी ग्रुप के कोल वाशरी प्लांट विस्तार के लिए प्रस्तावित जनसुनवाई पर बवाल खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण से कराह रहे गतौरा, लिमतरा, फरहदा और कर्रा के लोगों को अंधेरे में रखकर ‘गुपचुप’ तरीके से सुनवाई निपटाने की तैयारी है।

क्या है विवाद?
- विस्तार का प्लान: हिन्द एनर्जी कर्रा प्लांट की क्षमता बढ़ाने जा रही है। पर्यावरण मंजूरी के लिए जनसुनवाई जरूरी है। 2. ‘कागज चिपका कर इतिश्री’: ग्रामीण राजेश सिंह का आरोप, “पंचायत भवन पर एक पर्चा चिपका दिया। अखबार में विज्ञापन इतना छोटा छपा कि किसी को दिखे ही न।” प्लांट के कर्मचारियों तक को तारीख नहीं पता। 3. पहले से नर्क जैसे हालात: • गतौरा रेलवे स्टेशन: प्लेटफॉर्म-पटरियों पर कोयले की काली परत। लोड-अनलोड से उड़ती डस्ट में यात्री बेहाल। • जेके कॉलेज: क्लासरूम में बैठना मुश्किल। छात्रों की ड्रेस काली, आंखों में जलन-सांस की तकलीफ रोज की बात। • खेत-खलिहान: धान-सब्जी पर डस्ट की परत, पैदावार 40% तक गिरी। • सेहत पर हमला: दमा, टीबी, स्किन एलर्जी के मरीज लगातार बढ़ रहे।
ग्रामीणों का अल्टीमेटम
फरहदा की सरपंच प्रतिनिधि सुनीता बाई बोलीं, “पुराने प्लांट ने ही जीना मुहाल कर दिया। विस्तार हुआ तो गांव खाली करने पड़ेंगे।” ग्रामीणों ने कलेक्टर और पर्यावरण मंडल को ज्ञापन सौंप 3 मांगें रखीं: - जनसुनवाई रद्द कर नए सिरे से व्यापक प्रचार के साथ तारीख तय हो 2. पहले मौजूदा प्रदूषण की जांच कर कंपनी पर कार्रवाई हो 3. स्वास्थ्य सर्वे कर प्रभावितों को मुआवजा मिले
नियमों की उड़ी धज्जियां?
EIA नोटिफिकेशन 2006 साफ कहता है — जनसुनवाई की सूचना 30 दिन पहले प्रमुख अखबारों, पंचायतों और वेबसाइट पर देनी है। 5 किमी दायरे के हर गांव में मुनादी जरूरी है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक भी नियम पूरा नहीं हुआ।
आगे क्या: ग्रामीणों ने चेताया है — अगर गुपचुप सुनवाई हुई तो हाईकोर्ट जाएंगे और प्लांट के सामने चक्काजाम करेंगे। पर्यावरण प्रेमियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है।

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