गुड़ फैक्ट्री में मजदूर की हत्या मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास
लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर की प्रभावी पैरवी के बाद जिला न्यायालय का बड़ा फैसला
मुंगेली। जिले के बहुचर्चित गुड़ फैक्ट्री हत्या प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी विवेचना और सशक्त अभियोजन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
जिला एवं सत्र न्यायालय, मुंगेली की न्यायाधीश Girija Devi Meravi ने थाना चिल्फी क्षेत्र के चर्चित हत्या प्रकरण में आरोपी रविंद्र उर्फ कश्यप और दीपक कश्यप को दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं— धारा 296, धारा 351(2), धारा 115(2), धारा 109 तथा धारा 103(1) सहपठित धारा 3(5) — के तहत दोषसिद्ध पाया।
मामले के अनुसार, 13 मार्च 2025 की रात थाना चिल्फी अंतर्गत ग्राम कान्हापुर चौक स्थित एक गुड़ फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले श्रमिकों के बीच शराब पीने के दौरान विवाद हो गया। बताया गया कि विवाद की शुरुआत पैसे चोरी होने की आशंका को लेकर हुई थी, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई।

अभियोजन के अनुसार, विवाद बढ़ने पर आरोपी रविंद्र उर्फ कश्यप और दीपक कश्यप ने गुड़ बनाने में प्रयुक्त लोहे की खुरपी और बांस के डंडे से श्रमिक सोनू उर्फ जावेद सहित अन्य मजदूरों पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में सोनू उर्फ जावेद गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं चिंटू कश्यप और धर्मेंद्र कश्यप गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की और साक्ष्य संकलित कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक Rajnikant Singh Thakur ने मजबूत पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष 24 गवाहों और महत्वपूर्ण दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान कुछ घायल पक्षकार और स्वतंत्र गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए, लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का सूक्ष्म परीक्षण किया। अदालत ने मृतक को अंतिम बार आरोपियों के साथ देखे जाने, शव बरामदगी के समय अंतराल, आरोपियों द्वारा किए गए प्रकटन कथन तथा जब्त हथियारों पर मानव रक्त पाए जाने जैसे अहम तथ्यों को निर्णायक माना।
सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को हत्या सहित अन्य अपराधों में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास तथा 100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय के इस फैसले को कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय गंभीर अपराधों में सशक्त विवेचना और प्रभावी अभियोजन की भूमिका को रेखांकित करता है।

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