गरियाबंद में खाद की कालाबाजारी पर बड़ा प्रहार, रिहायशी मकान से 52 बोरी रासायनिक खाद जब्तदेवभोग के लाटापारा में खाद्य विभाग की छापेमार कार्रवाई, सहकारी समिति से अवैध भंडारण की आशंका

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रिपोर्टर ✒️ बसंत कुमार

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में अवैध भंडारण और कालाबाजारी के खिलाफ खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रासायनिक खाद की भारी खेप जब्त की है। विकासखंड देवभोग अंतर्गत ग्राम पंचायत लाटापारा में विभागीय टीम द्वारा की गई औचक छापेमार कार्रवाई के दौरान एक रिहायशी मकान से बड़ी मात्रा में यूरिया और डीएपी खाद बरामद होने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खाद्य विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि ग्राम लाटापारा में एक मकान के भीतर अवैध रूप से रासायनिक खाद का भंडारण किया गया है। सूचना के आधार पर विभागीय अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थानीय निवासी बलिराम यादव के घर पर दबिश दी। जांच के दौरान मकान के भीतर से 42 बोरी यूरिया और 10 बोरी डीएपी खाद, कुल 52 बोरी रासायनिक खाद बरामद की गई, जिसे मौके पर ही जब्त कर लिया गया।

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प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि जब्त की गई खाद की यह बड़ी खेप सहकारी समिति लाटापारा से अवैध रूप से निकालकर जमा की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, संदेही बलिराम यादव (पिता गोवर्धन यादव) पिछले कुछ समय से सहकारी समिति लाटापारा में कार्यरत है। इसी कारण मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है तथा विभाग अब आपूर्ति श्रृंखला और स्टॉक रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रहा है।

सूत्रों का कहना है कि आगामी खरीफ सीजन में किसानों की बढ़ती मांग और खाद की संभावित कमी का फायदा उठाकर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बिक्री करने की योजना बनाई जा रही थी। प्राथमिक आरोपों के अनुसार, इस अवैध भंडारण का उद्देश्य कालाबाजारी के जरिए मोटा मुनाफा कमाना था। यदि जांच में यह आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह किसानों के हितों के साथ सीधा खिलवाड़ माना जाएगा।

खाद्य विभाग की टीम ने बरामद सभी खाद बोरियों को अपने संरक्षण में लेकर सील कर दिया है। साथ ही मामले से जुड़े दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और वितरण अभिलेखों की कड़ी जांच शुरू कर दी गई है। विभागीय अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि रिकॉर्ड मिलान के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि खाद वैध तरीके से प्राप्त की गई थी या किसी संगठित अवैध नेटवर्क के माध्यम से इकट्ठा की गई।

वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अवैध भंडारण अथवा कालाबाजारी की पुष्टि होने पर दोषियों के खिलाफ संबंधित अधिनियमों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा कि कृषि सीजन के दौरान किसानों को आवश्यक खाद समय पर और निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

इस कार्रवाई के बाद देवभोग और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खाद माफियाओं तथा अवैध भंडारण करने वालों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई है। स्थानीय किसानों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि खेती के मुख्य समय में खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रहनी चाहिए। किसानों ने मांग की है कि सहकारी समितियों में खाद वितरण की नियमित निगरानी हो तथा कालाबाजारी में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल खाद्य विभाग की विस्तृत जांच जारी है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और कानूनी पहलू पूरी तरह स्पष्ट हो पाएंगे। यह कार्रवाई एक बार फिर संकेत देती है कि प्रशासन अब खाद की कालाबाजारी और किसानों के शोषण के मामलों में सख्त रुख अपनाने लगा है।

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