मुख्यमंत्री को दिया गया सतनाम पंथी महोत्सव का आमंत्रण

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

26 अगस्त को स्व. देवदास बंजारे की स्मृति में होगा भव्य प्रदेश स्तरीय आयोजन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वीकार किया न्योता

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पंथी नृत्य परंपरा और बाबा गुरु घासीदास के मानवता, समानता एवं सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 26 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले प्रदेश स्तरीय सतनाम पंथी महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। स्वर्गीय देवदास बंजारे की स्मृति में आयोजित इस महोत्सव में शामिल होने के लिए कलाकारों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात कर उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को महोत्सव की रूपरेखा से अवगत कराते हुए बताया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पंथी नृत्य और बाबा गुरु घासीदास के विचारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं तथा कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं और लोक कलाओं का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से भी प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर उन्हें महोत्सव की तैयारियों की जानकारी दी। आयोजन को लेकर उन्होंने भी शुभकामनाएं देते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। आयोजन की तैयारियां उनके मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद में की जा रही हैं।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सतनाम संस्कृति एवं संगीत अकादमी कलाकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हृदय प्रकाश अनंत ने किया। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय देवदास बंजारे ने अपने पंथी नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश-विदेश में नई पहचान दिलाई। उनके योगदान को स्मरण करते हुए इस वर्ष उनके स्मृति दिवस को प्रदेश स्तरीय सतनाम पंथी महोत्सव के रूप में भव्य स्वरूप दिया जा रहा है।

मुलाकात के दौरान अंतरराष्ट्रीय पंथी एवं पंडवानी कलाकार पद्मश्री डॉ. उषा बारले, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, शिवा जांगड़े, द्वारिका बर्मन, चंदन बांधे, राजमहंत सुखचंद भाष्कर, शशि सतनामी, पंडित राम जोशी, कृष्णा रात्रे सहित समाज के अनेक वरिष्ठ कलाकार एवं सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आयोजकों के अनुसार महोत्सव में प्रदेशभर से पंथी कलाकारों की सहभागिता होगी। कार्यक्रम के माध्यम से बाबा गुरु घासीदास के सत्य, अहिंसा, समानता और मानवता के संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही पंथी नृत्य और छत्तीसगढ़ की लोक कला को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा कलाकारों को मंच प्रदान करने का भी प्रयास किया जाएगा। आयोजकों ने प्रदेशवासियों से महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की अपील की है।

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