हरित दंतेवाड़ा की दिशा में बड़ा कदम: एक दिन में बने 1 लाख से अधिक सीड बॉल
सीड बॉल के जरिए पहाड़ियों और बंजर भूमि में बढ़ेगी हरियाली, ग्रामीणों और महिलाओं की भागीदारी से बना जन-अभियान
रायपुर । सीड बॉल निर्माण महाअभियान पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक जन-सहभागी पहल है l इसमें स्थानीय बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण में लपेटकर छोटी-छोटी गेंदें (सीड बाल) बनाई जाती हैं, जिन्हें बारिश में खाली या बंजर जमीन पर बिखेर दिया जाता है l दंतेवाड़ा जिले को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने मिलकर एक दिवसीय सीड बॉल निर्माण महाअभियान आयोजित किया। अभियान में ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों और सामाजिक संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान एक ही दिन में 1 लाख से अधिक सीड बॉल तैयार किए गए।
स्थानीय प्रजातियों के बीजों से तैयार किए गए सीड बॉल मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में अभियान की कार्ययोजना तैयार की गई। कृषि विभाग ने सीड बॉल निर्माण के लिए स्थानीय जलवायु के अनुकूल मिट्टी, जैविक खाद और महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, चार और खमार जैसी स्थानीय प्रजातियों के बीजों का चयन किया। ग्रामीणों और महिला स्व-सहायता समूहों को सीड बॉल तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया गया। सीड बॉल मिट्टी, जैविक खाद और बीजों से तैयार किए जाते हैं। इन्हें बारिश के मौसम में पहाड़ी, दुर्गम और बंजर क्षेत्रों में फैलाया जाता है। बारिश के पानी से बीजों को नमी मिलती है और वे प्राकृतिक रूप से अंकुरित होकर पौधों का रूप लेते हैं। इस तकनीक में गड्ढे खोदने, नियमित सिंचाई और ट्री-गार्ड की आवश्यकता नहीं होती। इससे कम लागत में बड़े क्षेत्र में हरियाली विकसित की जा सकती है।

वन क्षेत्रों और बंजर भूमि में फैलाए जाएंगे सीड बॉल जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए सीड बॉल को वन विभाग और स्थानीय समितियों के सहयोग से वन क्षेत्रों, पहाड़ियों और अनुपजाऊ भूमि में फैलाया जाएगा, इससे जिले में हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी संरक्षण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। भविष्य में इन पेड़ों से मिलने वाले लघु वनोपज से ग्रामीणों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।
महिलाओं और ग्रामीणों की भागीदारी से बना जन-अभियान अभियान में महिला स्व-सहायता समूहों की विशेष भूमिका रही। विद्यार्थियों, किसानों, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। एक ही दिन में 1 लाख से अधिक सीड बॉल तैयार कर दंतेवाड़ा ने यह संदेश दिया है कि प्रशासनिक संकल्प, वैज्ञानिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। यह पहल आने वाले वर्षों में दंतेवाड़ा की पहाड़ियों और वन क्षेत्रों को और अधिक हरा-भरा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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