कलाकारों और साहित्यकारों के सम्मान-संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम, संस्कृति विभाग ने वितरित किए सहायता एवं छात्रवृत्ति राशि के चेक
पद्मविभूषण स्व. डॉ. तीजन बाई सहित आठ दिवंगत कलाकारों एवं साहित्यकारों के परिजनों को मिली आर्थिक सहायता
अभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों और विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देकर किया गया प्रोत्साहित
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ की कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में संस्कृति विभाग ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंत्रालय के सभाकक्ष में ‘कलाकार कल्याण कोष योजना’ तथा ‘अभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति योजना’ के अंतर्गत सहायता एवं छात्रवृत्ति राशि के चेक वितरित किए। कार्यक्रम में प्रदेश के वरिष्ठ कलाकारों, साहित्यकारों, युवा प्रतिभाओं तथा दिवंगत कलाकारों के परिजनों का सम्मान किया गया। आयोजन में कला और संस्कृति के संरक्षण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
कार्यक्रम के दौरान पद्मविभूषण स्व. डॉ. तीजन बाई, जो अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पंडवानी कलाकार थीं, उनके परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य सात दिवंगत वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों के परिजनों को भी एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देकर उनके कला और साहित्य के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान का सम्मान किया गया। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवा कलाकारों एवं विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजना के तहत सहायता राशि प्रदान कर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सहायता एवं छात्रवृत्ति राशि के चेक संस्कृति विभाग के सचिव एस. भारतीदासन, फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा मोना सेन तथा सिंधी अकादमी की अध्यक्षा सुषमा जैदानी ने हितग्राहियों एवं दिवंगत कलाकारों के परिजनों को प्रदान किए। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने कला और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए युवा पीढ़ी से उनकी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

संस्कृति विभाग के सचिव एस. भारतीदासन ने कहा कि छत्तीसगढ़ लोककला, लोक साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। कलाकारों और साहित्यकारों ने अपने जीवनभर समाज को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। ऐसे में उनके सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए संचालित योजनाएं न केवल कलाकारों का मनोबल बढ़ाती हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल कलाकारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा, सृजनशीलता और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि ‘कलाकार कल्याण कोष योजना’ तथा ‘अभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति योजना’ वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान और युवा प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन योजनाओं से प्रेरित होकर अधिक से अधिक युवा कला और साहित्य के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे तथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के सचिव एस. भारतीदासन, संचालक संजय कन्नौजे, फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा मोना सेन, सिंधी अकादमी की अध्यक्षा सुषमा जैदानी, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, कलाकार, साहित्यकार तथा दिवंगत कलाकारों एवं साहित्यकारों के परिजन उपस्थित रहे।
संस्कृति विभाग की यह पहल राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और युवा प्रतिभाओं के प्रोत्साहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कलाकार कल्याण कोष योजना और छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन कला एवं साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने, कलाकारों को सम्मानजनक सहयोग उपलब्ध कराने तथा प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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