नए तहसील भवन में दरारों ने खोली निर्माण की पोल, गुणवत्ता पर उठे सवाल
पचपेड़ी तहसील भवन में जगह-जगह चटकी दीवारें, दरारों पर लीपापोती के आरोप; निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
पचपेड़ी/बिलासपुर। आम जनता को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से शासकीय भवनों का निर्माण कराया जाता है, ताकि वर्षों तक लोगों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें। लेकिन बिलासपुर जिले के पचपेड़ी में हाल ही में निर्मित नए तहसील भवन की स्थिति निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। भवन की दीवारों में दिखाई दे रही दरारों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते निर्माण के कुछ ही समय बाद दीवारों में दरारें उभर आई हैं। इससे भवन की मजबूती और गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।

दरारों पर मरम्मत के नाम पर लीपापोती के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि भवन की वास्तविक स्थिति सुधारने के बजाय दरारों पर सीमेंट और पुट्टी लगाकर उन्हें छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी भवन में इस प्रकार की दरारें नहीं आतीं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में भवन की सुरक्षा पर भी प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
मामले को लेकर लोगों में यह चर्चा भी है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी कितनी प्रभावी रही। नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित तकनीकी जांच होती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक न तो संबंधित अधिकारियों द्वारा विस्तृत निरीक्षण किया गया है और न ही निर्माण एजेंसी अथवा ठेकेदार के विरुद्ध किसी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की गई है। इससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग
क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता या निर्माण प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि शासकीय भवन जनता के टैक्स के पैसे से बनते हैं। ऐसे में निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि निर्माण के कुछ समय बाद ही भवन में दरारें दिखाई देने लगें तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
जनहित से जुड़ा मामला
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील भवन प्रतिदिन बड़ी संख्या में आने वाले ग्रामीणों और कर्मचारियों से जुड़ा सार्वजनिक भवन है। इसलिए इसकी गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में शासकीय निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही बनी रहे।
(नोट: इस समाचार में स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया गया है। संबंधित निर्माण एजेंसी, लोक निर्माण विभाग अथवा जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।)**

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