अमरकंटक में बड़े धूमधाम से मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव
गुरुदेव के चरणों में श्रद्धा का समर्पण,वैदिक मंत्रोच्चार,भक्ति भाव से हुआ गुरुपूजन
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा , भक्ति और उत्साह के साथ बड़े धूमधाम से मनाया गया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बड़ी संख्या में शिष्य , श्रद्धालु , संत-महात्मा एवं भक्तजन अमरकंटक पहुंचे और अपने-अपने गुरुओं का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया ।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नगर के विभिन्न आश्रमों , मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए । भजन-कीर्तन , सत्संग , श्रीमद्भागवत कथा , सुंदरकांड पाठ , गुरु पूजन तथा महाप्रसाद वितरण जैसे आयोजनों में शिष्यों , श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया । अमरकंटक के पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा और गुरु महिमा के जयघोष गूंजते रहे ।
परम तपस्वी वीतराग बाबा कल्याण दास जी महाराज के सान्निध्य में श्री कल्याण सेवा आश्रम में संत शिष्यों ने गुरु पूजन किया । शिष्यों , भक्तों ने भी गुरुपूजन बाद भव्य नगर भंडारे का आयोजन किया गया । पूजन-अर्चन के पश्चात संतों , ब्राह्मणों , शिष्यों , भक्तों तथा कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रसाद ग्रहण किया ।
वहीं शांति कुटी आश्रम में स्वामी रामभूषण दास जी के मार्गदर्शन में सप्ताहभर चली श्रीमद्भागवत कथा एवं सुंदरकांड पाठ का समापन हुआ । गुरु चरण पादुका पूजन के उपरांत शिष्यों ने अपने गुरुदेव का विधिवत पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया । इसके बाद आयोजित नगर भंडारे में कन्या , संत , ब्राह्मण , शिष्य , भक्त , जवाहर नवोदय विद्यालय , सरस्वती शिशु मंदिर के भैया बहने एवं आचार्यगण शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया ।
इसके अतिरिक्त मार्कण्डेय आश्रम के आचार्य स्वामी श्रीरामकृष्णानंद जी महाराज , गीता स्वाध्याय मंदिर के महंत स्वामी नर्मदानंद गिरी जी महाराज , श्रीपरमहंस धारकुंडी आश्रम के स्वामी लवलीन महाराज , दुर्गा मंदिर ज्वालेश्वर धाम के स्वामी जी , कामदगिरि आश्रम सहित अनेक आश्रमों एवं मंदिरों में श्रद्धापूर्वक गुरु पूजन संपन्न हुआ । शिष्यों ने अपने गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त कर सुख , शांति , उत्तम स्वास्थ्य एवं परिवार की समृद्धि की कामना की ।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति से अमरकंटक का धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण और अधिक सजीव हो उठा । श्रद्धा , आस्था और भक्ति से परिपूर्ण इस महोत्सव ने अमरकंटक की आध्यात्मिक गरिमा को एक बार फिर उजागर किया । अमरकंटक में हो रही रिमझिम वर्षा भी गुरु-शिष्यों के पावन मिलन और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को डिगा नही सकी ।

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